जेएनयू कैंटीनों पर एलपीजी आपूर्ति संकट का साया, छात्रों ने एहतियाती उपायों की मांग की

Press Trust of India | March 16, 2026 | 10:50 PM IST | 2 mins read

एसआईएस के एक छात्र ने कहा, "आने वाले दिनों में अगर संकट जारी रहता है, तो मेस की व्यंजन सूची में और भी बदलाव किए जाएंगे और खाने की कीमतें बढ़ जाएंगी।"

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की कैंटीन में भोजन की व्यंजन सूची पर लगातार प्रभाव पड़ रहा है। (प्रतीकात्मक-विकिमीडिया कॉमन्स)

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने सोमवार को कहा कि एलपीजी आपूर्ति संकट के बीच परिसर में मेस और ढाबों के सुचारू और निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने वाले एहतियाती उपायों की मांग को लेकर 'डीन ऑफ स्टूडेंट्स' के कार्यालय तक मार्च निकाला जाएगा।

छात्र संघ द्वारा मंगलवार को आयोजित होने वाले मार्च का आह्वान ऐसे समय में किया गया है, जब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की कैंटीन में भोजन की व्यंजन सूची पर लगातार प्रभाव पड़ रहा है।

'इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड' द्वारा साबरमती और लोहित छात्रावासों के मेस प्रमुखों को भेजे गए दो अलग-अलग पत्रों के अनुसार, "...सभी औद्योगिक और वाणिज्यिक ग्राहकों को आपूर्ति 11 मार्च 2026 को सुबह 6 बजे से पिछले 6 महीनों की उनकी औसत खपत के 80 प्रतिशत तक सीमित की जा रही है।"

JNU LPG Shortage: छात्रावास मेस मेनू संशोधित

गैस की आपूर्ति में 20 प्रतिशत की कटौती के चलते लोहित छात्रावास के संशोधित मेस व्यंजन सूची में यह स्पष्ट किया गया है कि कुछ दिनों में रोटी और पूरी उपलब्ध नहीं होंगी।

व्यंजन सूची में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि मंगलवार और शनिवार के दोपहर के भोजन में रोटी उपलब्ध नहीं होगी, इसके बदले में "केवल चावल" या खिचड़ी जैसे विकल्प जोड़े गए हैं।

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'दिशा स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन' के एक बयान में कहा गया है कि "आसन्न संकट" के कारण कैंटीन द्वारा कुछ खाद्य पदार्थों में कटौती की जा चुकी है; उदाहरण के लिए, एसआईएस (स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज) कैंटीन में अब समोसे नहीं मिल रहे हैं, और 'टेफ्लास' कैंटीन में चाय उपलब्ध नहीं है।

एसआईएस के एक छात्र ने कहा, "आने वाले दिनों में अगर संकट जारी रहता है, तो मेस की व्यंजन सूची में और भी बदलाव किए जाएंगे और खाने की कीमतें बढ़ जाएंगी। जेएनयू जैसे संस्थानों में पढ़ने वाले बड़ी संख्या में छात्रों के लिए बढ़ी हुई खाने की कीमतें वहन करना असंभव होगा।"

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