फैमिली बिजनेस में एमबीए प्रोग्राम का पहला बैच जुलाई 2027 में शुरू होगा। संस्थान की घोषणा के अनुसार, इस प्रोग्राम के फेज 1 के लिए आवेदन करने की लास्ट डेट 31 दिसंबर है, जबकि फेज 2 के लिए यह 2 अप्रैल, 2027 है।
ये शोधकर्ता अलग-अलग क्षेत्रों के संस्थानों से जुड़े हैं, जिनमें कृषि और जीव विज्ञान, कला और मानविकी, और कंप्यूटर विज्ञान से लेकर चिकित्सा, इंजीनियरिंग, भौतिकी, मनोविज्ञान और पशु चिकित्सा विज्ञान शामिल हैं।
इंडिया रिसर्च एंड इम्पैक्ट समिट में 27 अलग-अलग डोमेन में शानदार काम करने वाले रिसर्चर्स को अवॉर्ड दिए जाएंगे, जिसमें हर एक को ₹50,000 का नकद इनाम भी मिलेगा।
यह मामला एक आरटीआई अर्जी से शुरू हुआ, जिसमें 2023 तक के 10 साल के दौरान सभी चयनित अभ्यर्थियों के सामान्य अध्ययन एवं वैकल्पिक विषय के पेपर और साक्षात्कार में मिले अंकों का तुलनात्मक आंकड़ा मांगा गया था।
12,000 से अधिक अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्रालय, आईआईटी परिषद और संयुक्त प्रवेश बोर्ड (जेएबी) से मांग की है कि जेईई-एडवांस्ड में शामिल होने के अवसरों की संख्या बढ़ाकर 3 की जाए या फिर 2 प्रयासों की अनुमति 3 लगातार वर्षों में दी जाए।
रिपोर्ट में कहा गया, ''कक्षा 10 और 12 के बोर्ड विषय रूपरेखा में बदलाव कर व्यावसायिक विषयों को समान महत्व दिया जाना चाहिए। साथ ही सभी राज्यों के बोर्ड को 10वीं के बोर्ड प्रमाणन के लिए इस संशोधित रूपरेखा को अपनाना चाहिए।''
'विकसित भारत @2047' के नारों के बीच, जमीनी हकीकत यह है कि देश की पूरी परीक्षा व्यवस्था विश्वसनीयता के संकट से जूझ रही है। चाहे स्कूली स्तर हो, उच्च शिक्षा हो या भर्ती परीक्षाएं- केंद्र और राज्यों, दोनों के ही दावे खोखले नजर आते हैं।
कर्नाटक, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी हजारों टीचिंग पोस्ट वेकेंट हैं। यह समस्या केवला कुछ राज्यों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश की पूरी शिक्षा प्रणाली के लिए बड़ी चुनौती है, जिस पर सरकार को तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।
नीट यूजी 2026 की परीक्षा में जिन शिक्षकों को प्रश्नपत्र तैयार करने और मराठी में अनुवाद करने का काम दिया गया था, उनमें रसायन विज्ञान के शिक्षक पी. वी. कुलकर्णी, भौतिकी की शिक्षिका मनीषा गुरुनाथ मंधारे और जीव विज्ञान की शिक्षिका मनीषा संजय हवलदार शामिल थीं।
अधिकारियों ने नड्डा को बताया कि नीट-यूजी काउंसलिंग में प्रौद्योगिकी आधारित और छात्र-केंद्रित कई बड़े सुधार किए गए हैं, जिनका मकसद दाखिला प्रक्रिया को सरल बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और आसान पहुंच सुनिश्चित करना है।