Santosh Kumar | January 27, 2026 | 08:47 AM IST | 2 mins read
गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी नियमों को "काला कानून" बताया।

नई दिल्ली: बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) के नए नियमों के विरोध में इस्तीफा दे दिया है। सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने फेसबुक और एक्स पर अपने घर के बाहर पोस्टर पकड़े हुए तस्वीरें पोस्ट कीं, जिन पर "यूजीसी रोलबैक" और "भारत शंकराचार्य और संतों का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा" जैसे नारे लिखे थे। यह पोस्ट जल्दी ही वायरल हो गई। उन्होंने मीडिया से कहा कि यूजीसी के नियम रॉलेट एक्ट की तरह दमनकारी हैं।
बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सरकारी नीतियों विशेषकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मामले पर नाराजगी जताते हुए सोमवार को सेवा से इस्तीफा दिया।
बता दें कि कानपुर नगर के निवासी अग्निहोत्री पहले उन्नाव, बलरामपुर और लखनऊ समेत कई जिलों में एसडीएम के रूप में कार्य कर चुके हैं और प्रशासनिक हलकों में अपने स्पष्ट विचारों व सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं।
गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए अग्निहोत्री ने यूजीसी नियमों को "काला कानून" बताते हुए आरोप लगाया कि ये कॉलेजों के शैक्षणिक वातावरण को दूषित करेंगे, इन्हें तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।
उन्होंने 13 जनवरी को प्रकाशित यूजीसी विनियम 2026 पर आरोप लगाया कि इससे ब्राह्मण समुदाय के लोगों पर अत्याचार होंगे। उन्होंने कहा कि इसके प्रावधान भेदभावपूर्ण हैं और सामाजिक अशांति व आंतरिक असंतोष को जन्म दे सकते हैं।
अग्निहोत्री ने कहा कि ब्राह्मण जनप्रतिनिधि किसी कॉरपोरेट कंपनी के कर्मचारी बनकर रह गए हैं। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से बीटेक और एलएलबी की पढ़ाई की थी। अग्निहोत्री ने अमेरिका में भी काम किया है।
अग्निहोत्री के पद से इस्तीफा देने के मामले को लेकर विपक्षी दलों कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश को डर से नहीं संविधान से चलाया जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अजय राय ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर एक पोस्ट में लिखा, “बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा कथित तौर पर इस्तीफा दिया जाना बेहद गंभीर संकेत है।”
यूजीसी विनियम, 2026 की हाल में जारी अधिसूचना की सामान्य वर्ग ने आलोचना की है। आलोचकों का तर्क है कि जाति-आधारित पूर्वाग्रह को दूर करने के प्रयास के तहत उठाया गया यह कदम उनके खिलाफ भेदभाव पैदा कर सकता है।
यूजीसी ने आदेश दिया है कि हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज धर्म, जाति, लिंग, जन्म स्थान और विकलांगता के आधार पर भेदभाव को रोकने के लिए एक इक्विटी सेंटर बनाए। यूजीसी ने जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए नए नियम लागू किए हैं।
ताकि एससी, एसटी और ओबीसी के छात्रों की शिकायतों का समाधान किया जा सके। हालांकि, जनरल कैटेगरी के कुछ लोगों का मानना है कि यह नया नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के उत्पीड़न का माध्यम बन सकता है।
इनपुट्स-पीटीआई
बिहार डीएलएड डमी एडमिट कार्ड 28 जनवरी से उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध होंगे। उम्मीदवार एडमिट कार्ड ऑफिशियल वेबसाइट bsebdeled.com से डाउनलोड कर सकते हैं। इसके बाद आवेदकों को अपने एप्लीकेशन फॉर्म में भरी गई डिटेल्स में किसी भी गलती को सुधारने का मौका मिलेगा।
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