Santosh Kumar | February 4, 2026 | 04:35 PM IST | 1 min read
दिल्ली यूनिवर्सिटी की रिसर्च, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल की देखरेख में आयोजित होने वाले इस कोर्स में 8 मॉड्यूल होंगे।

नई दिल्ली: मेडिकल फील्ड में एआई के बढ़ते असर को देखते हुए, दिल्ली यूनिवर्सिटी "एप्लीकेशन ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हेल्थ साइंसेज" नाम का एक ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करेगी। इस कोर्स को आज दिल्ली यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर प्रो. योगेश सिंह ने लॉन्च किया। वीसी ने कहा कि भविष्य में हमें टेक्नोलॉजी जानने वाले डॉक्टरों की जरूरत होगी, और इसलिए ऐसे कोर्स जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन कोर्स के साथ-साथ ऑफलाइन वीकेंड कोर्स भी शुरू किए जाने चाहिए।
कुलपति ने कहा कि जैसे कंप्यूटर आने पर लोगों को काम छीनने की चिंता हुई थी, वैसे ही एआई को लेकर कुछ लोग चिंता करते हैं कि यह रोजगार छीन लेगा। लेकिन डरने की जरूरत नहीं है, इसके साथ बहुत से रोजगार विकसित होंगे।
उन्होंने कहा कि समझ की समझ को विकसित करना ही शिक्षा है। इस मौके पर कई लोग मौजूद रहे। दिल्ली यूनिवर्सिटी की रिसर्च, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल की देखरेख में आयोजित होने वाले इस कोर्स में 8 मॉड्यूल होंगे।
यह कोर्स 15 सप्ताह तक चलेगा, इसमें हर बैच में 50 सीटें होंगी। कक्षाएं हर शनिवार और रविवार को रोज 2 घंटे होंगी। कोर्स में दाखिले के लिए सीएस, आईटी, इंजीनियरिंग, गणित, सांख्यिकी या लाइफ साइंस/हेल्थकेयर (एमबीबीएस, नर्सिंग, फार्मेसी) में बैचलर डिग्री होना अनिवार्य है।
इस कोर्स का मकसद हेल्थ साइंस में एआई के इस्तेमाल की बेसिक समझ देना है। पार्टिसिपेंट्स इंटरडिसिप्लिनरी प्रॉब्लम-सॉल्विंग, एथिकल बातों और प्रैक्टिकल एप्लीकेशंस पर फोकस करते हुए मेडिकल एआई सिस्टम को डिज़ाइन करना और उनका मूल्यांकन करना सीखेंगे।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि समानता नियम केवल प्रक्रियात्मक दिशानिर्देश नहीं, बल्कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए जवाबदेही व संरक्षण सुनिश्चित करने का एक अहम उपाय हैं, जिन्हें 'रोहित एक्ट' की भावना के अनुरूप लागू किया जाना चाहिए।
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