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Coaching Reforms: कक्षा 11 के स्तर पर प्रवेश परीक्षाएं कराने की संभावना तलाश रहा केंद्र, अधिकारी ने दी जानकारी

Press Trust of India | January 14, 2026 | 02:32 PM IST | 2 mins read

पिछले साल, शिक्षा मंत्रालय ने कोचिंग सेंटर, डमी स्कूल और एंट्रेंस एग्जाम की निष्पक्षता की समीक्षा करने के लिए 9 सदस्यों की एक कमेटी बनाई थी।

वर्तमान में अधिकतर प्रवेश परीक्षाएं कक्षा 12 के पाठ्यक्रम पर आधारित होती हैं। (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)
वर्तमान में अधिकतर प्रवेश परीक्षाएं कक्षा 12 के पाठ्यक्रम पर आधारित होती हैं। (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा प्रवेश परीक्षाओं में सुधार और कोचिंग केंद्रों पर निर्भरता कम करने के लिए गठित समिति कक्षा 11 में महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने या कक्षा की परीक्षाओं को उनके (प्रवेश परीक्षाओं के) कठिनाई के स्तर के अनुरूप बनाने की संभावना तलाश रहा है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

समिति आंकड़ों का विश्लेषण कर रही है कि प्रवेश परीक्षाओं का कठिनाई का स्तर कक्षा 12 के पाठ्यक्रम की कठिनाई के स्तर के अनुरूप है या नहीं, जबकि वर्तमान में अधिकतर प्रवेश परीक्षाएं कक्षा 12 के पाठ्यक्रम पर आधारित होती हैं।

पिछले साल, शिक्षा मंत्रालय ने कोचिंग सेंटर, डमी स्कूल और एंट्रेंस एग्जाम की निष्पक्षता की समीक्षा करने के लिए 9 सदस्यों की एक कमेटी बनाई थी। यह कमेटी उच्च शिक्षा के लिए कोचिंग पर निर्भरता कम करने के उपाय सुझाएगी।

Coaching Reforms: प्रवेश परीक्षाएं कक्षा 11 के स्तर पर

सूत्रों के अनुसार, ‘‘समिति की बैठक में हितधारकों ने सुझाव दिया कि कुछ प्रवेश परीक्षाएं कक्षा 11 के स्तर पर कराई जा सकती हैं या कम से कम कक्षा 11 की परीक्षाएं प्रवेश परीक्षाओं के समान एमसीक्यू प्रारूप में आयोजित की जाएं।’’

इस संभावना का अध्ययन किया जा रहा है। सूत्रों ने बताया, ‘‘समिति उन कमियों की भी समीक्षा कर रही है, जिनके कारण छात्र कोचिंग केंद्रों पर निर्भर हो जाते हैं। इनमें विश्लेषणात्मक सोच, तार्किक विवेचन तथा रटंत पद्धति का प्रचलन प्रमुख हैं।’’

कोचिंग के घंटे सीमित करना, स्कूल पाठ्यक्रम को इस तरह डिज़ाइन करना कि वह स्कूल के बाद होने वाली प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं के अनुरूप हो, और परीक्षा के परिणामों को अधिक महत्व देना भी समिति को प्राप्त हुए सुझावों में शामिल हैं।

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समिति में शामिल सदस्यों का विवरण

समिति के अन्य कार्यक्षेत्रों में छात्रों और माता-पिता में विभिन्न करियर मार्गों के प्रति जागरूकता के स्तर का मूल्यांकन करना और इस जागरूकता की कमी के कारण कुछ चुनिंदा प्रतिष्ठित संस्थानों पर अत्यधिक निर्भरता का प्रभाव, स्कूलों और कॉलेजों में करियर काउंसलिंग सेवाओं की उपलब्धता और प्रभावशीलता का आकलन करना, तथा करियर मार्गदर्शन ढांचों को सुदृढ़ करने के उपाय सुझाना भी शामिल है।

समिति के सदस्यों में सीबीएसई के अध्यक्ष, विद्यालय शिक्षा और उच्च शिक्षा विभागों के संयुक्त सचिव, आईआईटी मद्रास, एनआईटी त्रिची, आईआईटी कानपुर और एनसीईआरटी के प्रतिनिधि तथा स्कूलों के प्रधानाचार्य (एक-एक केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और निजी विद्यालय से) शामिल हैं।

देश में कोचिंग संस्थान हाल के वर्षों में कई विवादों के केंद्र में रहे हैं। यह कदम सरकार को छात्रों की आत्महत्याओं के बढ़ते मामलों, आग लगने की घटनाओं, कोचिंग संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और वहां अपनाई जा रही शिक्षण पद्धतियों को लेकर मिली शिकायतों के बाद उठाया गया है।

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