Press Trust of India | February 6, 2026 | 09:23 PM IST | 1 min read
पीठ ने एनबीईएमएस को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की सुनवाई दो सप्ताह बाद के लिए स्थगित कर दी।
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) को 2025-26 की नीट पीजी के लिए पात्रता 'कट-ऑफ पर्सेंटाइल' काफी कम करने के निर्णय पर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने एनबीईएमएस को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की सुनवाई दो सप्ताह बाद के लिए स्थगित कर दी।
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पीठ ने कहा, ''एक तरफ तो हमें यह सुनिश्चित करना है कि सीट व्यर्थ न जाएं, वहीं दूसरी तरफ, उम्मीदवारों के न आने का दबाव भी है, इसलिए कटऑफ कम कर दें...तब बहस इस बात पर होगी कि मानक गिराये जा रहे हैं तथा उसका जवाब यह होगा कि सीट बेकार जा रही हैं।''
पीठ ने कहा, ''इसलिए एक जगह संतुलन बनाना होगा।'' सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि असाधारण कारणों को छोड़कर पीजी प्रवेश में अंकों में छूट नहीं दी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि स्नातकोत्तर स्तर पर मानकों को और सख्त करने की आवश्यकता है। कोर्ट ने केंद्र सरकार, एनबीई, एनएमसी और अन्य को नोटिस जारी किए थे। एनबीई द्वारा जनरल के लिए कटऑफ 50 प्रतिशत से घटाकर 7% कर दिया गया है।
न्यायालय सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन, डॉ. सौरभ कुमार, डॉ. लक्ष्य मित्तल और डॉ. आकाश सोनी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें कहा गया था कि कट-ऑफ में कमी अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करती है।