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उत्तर प्रदेश में फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, मुख्य साजिशकर्ता समेत 4 आरोपी गिरफ्तार

Press Trust of India | June 10, 2026 | 08:43 AM IST | 2 mins read

जांच में सामने आया कि कम से कम 8 विश्वविद्यालयों और बोर्डों के नाम पर नकली दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे, जिनमें अन्नामलाई विश्वविद्यालय, लिंगायाज विद्यापीठ, कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी, उस्मानिया यूनिवर्सिटी, डीवाई पाटिल विद्यापीठ, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय और अन्य शामिल हैं।

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि, “कुछ मामलों में तो प्रिंट की गुणवत्ता असली प्रमाणपत्रों से भी बेहतर लग रही थी।” (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि, “कुछ मामलों में तो प्रिंट की गुणवत्ता असली प्रमाणपत्रों से भी बेहतर लग रही थी।” (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के कानपुर में 9 जून को पुलिस ने फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ करने का दावा किया है। पुलिस ने इस मामले में कथित मुख्य साजिशकर्ता समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, इस गिरोह के तार देश और विदेश से जुड़े होने की आशंका है।

पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई किदवई नगर और बेकनगंज इलाकों में की गई छापेमारी के दौरान हुई, जहां एक रिहायशी इमारत में हाई-टेक अवैध प्रिंटिंग सेटअप चलाया जा रहा था। जांच में सामने आया है कि आरोपी हाई स्कूल से लेकर पीएचडी स्तर तक की नकली शैक्षणिक डिग्रियां और अंकपत्र तैयार कर रहे थे तथा उन्हें कूरियर और डिजिटल माध्यमों से देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी भेजा जा रहा था।

गिरफ्तार आरोपी -

पुलिस ने कथित सरगना की पहचान ज़िया-उल-हसन उर्फ समीर उर्फ आतिफ (32) के रूप में की है, जो हीरामन पुरवा का निवासी है और वर्तमान में चमनगंज के नाला रोड स्थित इकबाल बिल्डिंग में रह रहा था। उसके साथ उसके भाई हसन आसिफ (34), आमिर अहमद (33) और नूरुद्दीन (30) को भी गिरफ्तार किया गया है।

प्रिंट की गुणवत्ता असली से भी बेहतर -

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि तैयार किए जा रहे नकली दस्तावेज असली जैसे प्रतीत होते थे। उन्होंने कहा, “कुछ मामलों में तो प्रिंट की गुणवत्ता असली प्रमाणपत्रों से भी बेहतर लग रही थी।”

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छापेमारी के दौरान पुलिस ने दो लैपटॉप, एक डेस्कटॉप, कलर प्रिंटर, सीपीयू, तीन हार्ड डिस्क, वाई-फाई राउटर, विभिन्न विश्वविद्यालयों के 141 रबर स्टांप, 80 होलोग्राम स्ट्रिप, होलोग्राम डाई, फ्लोटिंग पंच डाई, 830 खाली मार्कशीट शीट, बड़ी मात्रा में प्रिंटिंग सामग्री तथा कई नकली सर्टिफिकेट और डिग्रियां बरामद कीं।

नकली अंकपत्र -

पुलिस जांच में पता चला है कि यह गिरोह कई वर्षों से सक्रिय था और प्रत्येक नकली अंकपत्र या प्रमाणपत्र के लिए 10,000 से 15,000 रुपये तक वसूलता था। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कम से कम आठ विश्वविद्यालयों और बोर्डों के नाम पर नकली दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे, जिनमें अन्नामलाई विश्वविद्यालय, लिंगायाज विद्यापीठ, कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी, उस्मानिया यूनिवर्सिटी, डीवाई पाटिल विद्यापीठ, अलगप्पा यूनिवर्सिटी, आचार्य नागार्जुन यूनिवर्सिटी और छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर शामिल हैं।

पुलिस ने बताया कि यह गिरोह फिशिंग वेबसाइट्स के जरिए नकली ऑनलाइन वेरिफिकेशन सिस्टम भी तैयार करता था, जिससे दस्तावेज जांच के दौरान असली प्रतीत होते थे। जांच में इस गिरोह के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का भी खुलासा हुआ है।

कनाडा से था संपर्क -

पुलिस आयुक्त ने बताया कि ज़िया-उल-हसन कनाडा में रहने वाले दो साथियों भावीन और बारी के संपर्क में था, जिन्हें वह नकली दस्तावेजों की पीडीएफ और कोरड्रा फाइलें भेजता था। इनका उपयोग विदेशों में नौकरी पाने के लिए किया जाता था। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। सभी चार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

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