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रेलवे में स्थायी नौकरी दिलाने के बहाने ठगी करने वाले गिरोह का दिल्ली पुलिस ने किया भंडाफोड़, 3 आरोपी गिरफ्तार

Abhay Pratap Singh | June 2, 2026 | 11:38 AM IST | 2 mins read

पूछताछ के दौरान जांचकर्ताओं ने पाया कि ईशा और रंजीत ने रेलवे में नौकरी लगवाने के बहाने शिकायतकर्ता से 3.6 लाख रुपये लिए थे और बाद में यह रकम आलम को स्थानांतरित कर दी थी।

पुलिस ने कहा कि जांच में धोखाधड़ी को बढ़ावा देने में कुछ रेलवे कर्मियों की संभावित संलिप्तता का भी संकेत मिला है। (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)
पुलिस ने कहा कि जांच में धोखाधड़ी को बढ़ावा देने में कुछ रेलवे कर्मियों की संभावित संलिप्तता का भी संकेत मिला है। (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने रेलवे में स्थायी नौकरी दिलाने के बहाने लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मल्टी-टास्किंग स्टाफ (MTS) और रेलवे में लिपिक पदों पर भर्ती के संबंध में कथित धोखाधड़ी और जालसाजी को लेकर 30 मई को पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन थाने में एक शिकायत दर्ज कराई गई थी।

रेलवे के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) बी बोम्मा रेड्डी ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई और राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) तथा रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की एक संयुक्त टीम ने जांच शुरू की।

पुलिस के अनुसार, जाल बिछाया गया और इसके तहत शिकायतकर्ता ने ईशा नामक आरोपी से संपर्क किया और रेलवे में नौकरी दिलाने के लिए कथित तौर पर मांगी गई शेष राशि लेने के वास्ते उसे पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन बुलाया। डीसीपी ने बताया कि सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने चांदनी चौक के गेट नंबर 3 के पास से ईशा को पकड़ लिया।

पुलिस ने बताया कि उससे पूछताछ के आधार पर एक अन्य आरोपी रंजीत को आईएसबीटी कश्मीरी गेट इलाके से पकड़ा गया। इसके बाद तीसरे आरोपी आलम को पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 16 से दबोच लिया गया। पूछताछ के दौरान जांचकर्ताओं ने पाया कि ईशा और रंजीत ने रेलवे में नौकरी लगवाने के बहाने शिकायतकर्ता से 3.6 लाख रुपये लिए थे और बाद में यह रकम आलम को स्थानांतरित कर दी थी।

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रेड्डी ने कहा, “जांच से पता चला है कि आलम कथित तौर पर दो अन्य संदिग्धों अतुल कदम और ए के खान के संपर्क में था, जिन्होंने बड़ौदा हाउस और रेल भवन सहित वरिष्ठ रेलवे कार्यालयों से संबंध होने का कथित तौर पर दावा किया था।” अधिकारियों ने कहा कि कथित भर्ती प्रक्रिया को विश्वसनीय बनाने के लिए, आरोपियों की कथित मिलीभगत से कुलदीप नामक व्यक्ति ने उत्तर रेलवे केंद्रीय अस्पताल में शिकायतकर्ता के बेटे का मेडिकल परीक्षण भी कराया था।

अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने कथित तौर पर नियुक्ति पत्र और 'कॉल लेटर' सहित भर्ती से संबंधित जाली दस्तावेज तैयार किए और उसका विश्वास जीतने तथा और पैसे ऐंठने के लिए उन्हें स्पीड पोस्ट के माध्यम से शिकायतकर्ता को भेजा।

पुलिस ने बताया कि तीनों आरोपियों से पूछताछ की गई है और उन्हें नोटिस तामील कराए गए हैं। पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच से संकेत मिला है कि इस गिरोह के माध्यम से कई अन्य लोगों से भी ठगी की गई होगी।

पुलिस ने कहा कि जांचकर्ता अन्य पीड़ितों की पहचान करने और शेष आरोपियों का पता लगाने के लिए वित्तीय लेनदेन और अन्य सबूतों की जांच कर रहे हैं। पुलिस ने कहा कि जांच में धोखाधड़ी को बढ़ावा देने में कुछ रेलवे कर्मियों की संभावित संलिप्तता का भी संकेत मिला है। उनकी भूमिका की जांच की जा रही है और छानबीन के निष्कर्षों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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