Santosh Kumar | May 20, 2026 | 03:55 PM IST | 2 mins read
बिहार में चाक्षुष कला (फाइन आटर्स) की पढ़ाई तो पटना आर्ट कॉलेज में स्नातक स्तर तक की होती है, लेकिन प्रदर्श (मंचीय कला) अशिक्षण के लिए कोई कॉलेज या विश्वविद्यालय नहीं है। ऐसे में कला संस्कृति विभाग ने यह निर्णय ले लिया है।

नई दिल्ली: बिहार में राष्ट्रीय कला विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए सरकारी स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। इसके अतिरिक्त, भिखारी ठाकुर, जिन्हें व्यापक रूप से "भोजपुरी का शेक्सपियर" कहा जाता है, के नाम पर एक संग्रहालय बनाने की योजना भी चल रही है। कला एवं संस्कृति विभाग ने इन दोनों प्रस्तावों को साकार करने का संकल्प लिया है। बिहार सरकार ने राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए यह बड़ा फैसला लिया है।
इस विश्वविद्यालय में आधुनिक सुविधाओं के साथ पारंपरिक कलाओं का संरक्षण किया जाएगा। दिल्ली, तमिलनाडु, यूपी, बंगाल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में पहले से ही कला विश्वविद्यालय हैं।
बिहार में चाक्षुष कला (फाइन आटर्स) की पढ़ाई तो पटना आर्ट कॉलेज में स्नातक स्तर तक की होती है, लेकिन प्रदर्श (मंचीय कला) शिक्षण के लिए कोई कॉलेज या विश्वविद्यालय नहीं है। ऐसे में कला संस्कृति विभाग ने यह निर्णय ले लिया है।
विभाग जल्द ही मंजूरी के लिए प्रस्ताव पेश करेगा। कला विश्वविद्यालय में सभी संबंधित विषयों और कलाओं के विशेषज्ञ, शिक्षक होंगे, ताकि कलाकार रंगमंच, नृत्य और संगीत तथा इनकी उपविधाओं में विधिवत प्रशिक्षित होकर डिग्री पा सकें।
यह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर का होगा, जिससे विभिन्न राज्यों के छात्र उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। बिहार कला विश्वविद्यालय की स्थापना यह सुनिश्चित करेगी कि स्थानीय प्रतिभा को उचित पहचान और सम्मान मिले।
हिंदुस्तान मीडिया से बात करते हुए, कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा कि कला विश्वविद्यालय की स्थापना से कलाकारों के पलायन पर रोक लगेगी। राज्य की कला प्रतिभा अपने यहां विकसित होगी। हमारी कलाओं का संरक्षण होगा।
उन्होंने आगे कहा कि यदि अन्य राज्यों के कला के छात्र भी अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए इस क्षेत्र में आते हैं, तो इससे बिहार की ब्रांडिंग भी होगी। उन्होंने बताया कि भिखारी ठाकुर के जीवन पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री बनाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि शुरुआत में, सारण में स्थित कला एवं संस्कृति विभाग के संग्रहालय के भीतर भिखारी ठाकुर के लिए गैलरी बनाई जाएगी। यह गैलरी उनके जीवन, संघर्षों, कलात्मक कार्यों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करेगी।
भिखारी ठाकुर के जीवन पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री भी तैयार की जाएगी, जिसे संग्रहालय आने वाले दर्शकों को दिखाया जाएगा। बिहार के सारण जिले में जन्मे भिखारी ठाकुर एक महान नाटककार, कवि, गीतकार और समाज सुधारक थे।
उन्हें 'बिदेसिया' शैली के जनक के रूप में भी याद किया जाता है। भिखारी ठाकुर को मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किए जाने की लगातार मांगें उठती रही हैं, अभी तक उन्हें यह सम्मान प्रदान नहीं किया गया है।
अधिकारी ने कहा, ''अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए कुशल युवाओं की मजबूत शृंखला तैयार करना है। गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए क्षेत्र खोले जाने के बाद पिछले 5 वर्षों में इस क्षेत्र में 60 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक का निजी निवेश आकर्षित हुआ है।''
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