Press Trust of India | April 26, 2026 | 05:44 PM IST | 1 min read
इस पहल के तहत ऐसी 7 प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी, जो छात्रों को उपग्रह प्रणालियों, रॉकेट तकनीक और मिशन डिजाइन में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करेंगी।

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को देशभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजनाओं की समीक्षा की। यहां जारी एक बयान में यह जानकारी दी गयी है। इस पहल के तहत ऐसी 7 प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी, जो छात्रों को उपग्रह प्रणालियों, रॉकेट तकनीक और मिशन डिजाइन में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करेंगी।
अधिकारी ने कहा, ''अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए कुशल युवाओं की मजबूत शृंखला तैयार करना है। गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए क्षेत्र खोले जाने के बाद पिछले 5 वर्षों में इस क्षेत्र में 60 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक का निजी निवेश आकर्षित हुआ है।''
जितेंद्र सिंह ने भारत में अंतरिक्ष सुधारों की प्रगति और मूल्य शृंखला के विभिन्न क्षेत्रों में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी की भी समीक्षा की। देश का निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से विस्तारित हुआ है।
स्टार्टअप की संख्या 2019 में एकल अंक से बढ़कर अब तक 400 से अधिक हो गई है। अधिकारी ने कहा, ''ये स्टार्टअप अब प्रक्षेपण यान, उपग्रह और पेलोड निर्माण, जमीनी अवसंरचना, डेटा सेवाओं तथा उभरते इन-ऑर्बिट क्षेत्रों में सक्रिय हैं।''
सरकार ने इसके समर्थन में कई पहलें शुरू की हैं। अधिकारी ने कहा कि उदाहरण के तौर पर 500 करोड़ रुपये का 'टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड' शुरुआती चरण के नवाचारों को व्यावसायिक रूप से सफल उत्पादों में बदलने में मदद कर रहा है।"
अधिकारी ने कहा, ''कुशल कार्यबल तैयार करने के प्रयास भी जारी हैं। अब तक 17 विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं और लगभग 900 प्रतिभागियों को उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण यान प्रणालियों और अंतरिक्ष साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में प्रमाणित किया गया है।"
जिन उम्मीदवारों के आवेदन 21 अप्रैल तक जमा हो गए थे, वे अब आधिकारिक वेबसाइट deled.biharboardonline.org के माध्यम से अपने स्कूल के प्रिंसिपल के जरिए अपने रजिस्ट्रेशन कार्ड प्राप्त कर सकते हैं।
Santosh Kumar