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JEE Main 2026 Session 2: जेईई मेन सेशन 2 के लिए परसेंटाइल, रॉ मार्क्स व नॉर्मलाइजेशन का सरल विश्लेषण जानें

Abhay Pratap Singh | April 22, 2026 | 11:35 AM IST | 4 mins read

जेईई मेन 2026 में एनटीए स्कोर परसेंटाइल आधारित होता है, जो सीधे रॉ मार्क्स को नहीं दर्शाता। यह स्कोर 0 से 100 के बीच होता है और किसी विशेष शिफ्ट में अन्य अभ्यर्थियों के मुकाबले प्रदर्शन को दर्शाता है।

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एनटीए कई परीक्षा सत्रों में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया का उपयोग करती है। (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)
एनटीए कई परीक्षा सत्रों में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया का उपयोग करती है। (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने जेईई मेन 2026 (JEE Main 2026) सेशन 2 की परीक्षा का आयोजन बीई/बीटेक (पेपर 1) के लिए 2, 4, 5, 6 और 8 अप्रैल को तथा बीआर्क/बीप्लानिंग (पेपर 2) के लिए 7 अप्रैल को किया था। पेपर 1 (बीई/बीटेक) का परिणाम/ एनटीए स्कोर की आधिकारिक वेबसाइट jeemain.nta.nic.in पर जारी कर दिया गया है। सीबीटी मोड में आयोजित जेईई मेन अप्रैल 2026 परीक्षा में कुल 26 छात्रों ने 100 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। इस लेख में उम्मीदवार जेईई मेन 2026 सेशन 2 के लिए परसेंटाइल, रॉ मार्क्स व नॉर्मलाइजेशन का सरल विश्लेषण देख सकते हैं।

JEE Main 2026 Session 2 Analysis Percentile: स्कोर बनाम वास्तविक अंक

2 से 8 अप्रैल 2026 के बीच आयोजित जेईई मेन सेशन 2 की नौ शिफ्टों के विश्लेषण में स्कोरिंग में स्पष्ट अंतर देखने को मिला। 99वें परसेंटाइल के लिए रॉ मार्क्स सबसे कठिन शिफ्ट में 165 और सबसे आसान में 196 रहे, यानी 31 अंकों का अंतर रहा। 98वें पर 27 और 97वें पर 26 अंकों का अंतर दर्ज किया गया। केवल दो शिफ्टों में ही 300 का पूर्ण स्कोर देखने को मिला, जबकि एक शिफ्ट में 100वें परसेंटाइल के लिए 285 अंक ही पर्याप्त रहे, क्योंकि उस पेपर का यही सर्वोच्च स्कोर था।

Official NTA Normalization Formula: एनटीए नॉर्मलाइजेशन मैथड

  • 100 × (शिफ्ट में ऐसे उम्मीदवारों की संख्या जिनका रॉ स्कोर उम्मीदवार के स्कोर से कम या बराबर है ÷ शिफ्ट में कुल उम्मीदवार)

एनटीए ने बताया कि, मल्टी-शिफ्ट और कई दिनों में आयोजित परीक्षाओं में स्कोर का अंतर असामान्य नहीं माना जाता। विशेषज्ञों के अनुसार, लाखों अभ्यर्थियों के शामिल होने के कारण अलग-अलग प्रश्नपत्रों का कठिनाई स्तर पूरी तरह समान होना संभव नहीं है, चाहे प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समितियां कितनी भी सावधानी और कड़े मानकों के साथ काम करें। यह मूल्यांकन की स्वाभाविक प्रक्रिया है, न कि व्यवस्था की कमी। दुनिया भर में कोई भी परीक्षा संस्था, जो मल्टी-शिफ्ट परीक्षा आयोजित करती है, इसी स्थिति का सामना करती है।

NTA uses the Percentile System: परसेंटाइल स्कोर

परसेंटाइल स्कोर एक सरल प्रश्न का उत्तर देता है। उसी शिफ्ट में, उसी प्रश्नपत्र और समान परिस्थितियों में परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों में आपने कितनों से बेहतर प्रदर्शन किया? 99.5 परसेंटाइल का मतलब है कि आपने अपने उसी शिफ्ट के 99.5% उम्मीदवारों से बेहतर प्रदर्शन किया, चाहे पेपर कठिन हो या आसान या टॉपर का स्कोर 285 हो या 300। प्रत्येक शिफ्ट अपने आप में एक समान प्रतिस्पर्धा का स्तर बन जाती है, जहां रैंकिंग पूरी तरह रॉ मार्क्स के आधार पर तय होती है, क्योंकि सभी अभ्यर्थियों ने समान परिस्थितियों में परीक्षा दी होती है।

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JEE Main 2026 Session 2 Result: रॉ मार्क्स

यदि केवल रॉ मार्क्स के आधार पर परिणाम तैयार किया जाए, तो कठिन शिफ्ट में 180 अंक लाने वाला छात्र केवल शिफ्ट के कारण नुकसान में रहेगा, जबकि आसान शिफ्ट में उतने ही अंक पाने वाले छात्र को अनुचित लाभ मिलेगा। ऐसी व्यवस्था न्यायसंगत नहीं होगी, क्योंकि इससे छात्र का भविष्य उसकी मेहनत के बजाय उसे मिली शिफ्ट पर निर्भर हो जाएगा। यानी मेहनत से अधिक किस्मत को महत्व मिल जाएगा।

JEE Main Normalization Process: नॉर्मलाइजेशन

एनटीए एक सांख्यिकीय रूप से आधारित नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया अपनाता है। इसमें पहले हर शिफ्ट में उम्मीदवारों के परसेंटाइल स्कोर की गणना की जाती है, फिर इन परसेंटाइल को सभी शिफ्टों में मिलाकर अंतिम रैंक तैयार की जाती है। यह तरीका एक सरल साइकोमेट्रिक सिद्धांत पर आधारित है - विभिन्न प्रश्नपत्रों में समान सापेक्ष प्रदर्शन के लिए समान अंक मिलने चाहिए। यानी जिस उम्मीदवार ने अपनी शिफ्ट में 99.5% अभ्यर्थियों से बेहतर प्रदर्शन करता है, उसे दूसरी शिफ्ट में उतना ही प्रदर्शन करने वाले उम्मीदवार के बराबर माना जाता है, चाहे रॉ मार्क्स अलग क्यों न हों।

बता दें, नॉर्मलाइजेशन मैथड न तो नई है, न ही किसी एक संस्था तक सीमित या प्रयोगात्मक है। यह शिक्षा मूल्यांकन के स्थापित सिद्धांतों पर आधारित है और दुनिया भर की प्रमुख परीक्षा एजेंसियों द्वारा अपनाई जाती है। साथ ही, इसे शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित विशेषज्ञ समितियों द्वारा इसकी समीक्षा की जा चुकी है। समय-समय पर प्राप्त साक्ष्यों और फीडबैक के आधार पर इसमें लगातार सुधार भी किया जाता है।

NTA Normalization Formula: परीक्षा शिफ्ट का प्रभाव और रैंकिंग प्रणाली

जेईई मेन में 100 परसेंटाइल एनटीए स्कोर यह दर्शाता है कि उम्मीदवार ने अपनी विशेष परीक्षा शिफ्ट में उच्चतम रॉ स्कोर प्राप्त किया है। इसका मतलब यह नहीं है कि उन्होंने 100% अंक प्राप्त किए हैं। परसेंटाइल स्कोर (खासकर जब अलग शिफ्ट में समान रॉ मार्क्स पर अलग परिणाम दिखते हैं) को लेकर उठने वाले सवालों के बीच विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह उम्मीदवार की क्षमता का सबसे सटीक और निष्पक्ष आकलन होता है। इसे इस तरह तैयार किया जाता है कि आवंटित शिफ्ट का रैंक पर कोई प्रभाव न पड़े। उम्मीदवार की मेहनत, तैयारी और उसी प्रश्नपत्र में शामिल अन्य अभ्यर्थियों के मुकाबले प्रदर्शन के आधार पर ही परसेंटाइल निर्धारित किया जाता है।

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