UGC Equity Rules 2026: यूजीसी के नियमों को लागू करने की मांग को लेकर डीयू में छात्रों ने किया विरोध प्रदर्शन
Press Trust of India | February 4, 2026 | 11:45 AM IST | 1 min read
जेएनयूएसयू के पूर्व अध्यक्ष नितीश ने कहा, "सड़कों पर वर्षों की कुर्बानी और संघर्ष के बाद हमने यूजीसी को ऐसे नियम लाने के लिए मजबूर किया ताकि जवाबदेही तय हो।"
नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय के सैकड़ों छात्रों ने 3 फरवरी को नॉर्थ कैंपस में मार्च निकालकर यूजीसी समानता नियम 2026 को तत्काल लागू करने की मांग की। "इक्विटी मार्च" नामक यह विरोध प्रदर्शन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन समेत विभिन्न छात्र संगठनों ने आयोजित किया। तख्तियां थामे नारे लगा रहे छात्रों ने कहा कि हाल ही में इन नियमों पर लगी अदालती रोक के कारण उच्च शिक्षा में जाति-आधारित भेदभाव से निपटने का काफी समय से लंबित प्रयास नाकाम हो गया है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि समानता नियम केवल प्रक्रियात्मक दिशानिर्देश नहीं, बल्कि एससी, एसटी और ओबीसी के छात्रों के लिए जवाबदेही व संरक्षण सुनिश्चित करने का अहम उपाय हैं, जिन्हें 'रोहित एक्ट' की भावना के अनुरूप लागू किया जाना चाहिए।
'नियम वर्षों तक चले आंदोलनों का परिणाम'
'रोहित एक्ट' से आशय प्रस्तावित रोहित वेमुला अधिनियम से है, जिसमें भारतीय उच्च शिक्षा में छात्रों के खिलाफ जातिगत/पहचान-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए एक केंद्रीय कानून बनाने की बात कही गई।
यह कानून हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला के नाम पर है, जिन्होंने 2016 में कथित तौर पर जातिगत भेदभाव के चलते आत्महत्या की थी। छात्रों ने कहा कि ये नियम विश्वविद्यालय परिसरों में वर्षों तक चले आंदोलनों का परिणाम हैं।
छात्रों ने आरोप लगाया कि नियमों पर रोक से एक बार फिर कमजोर वर्ग के छात्र विश्वविद्यालयों में असुरक्षित महसूस करेंगे। जेएनयूएसयू के पूर्व अध्यक्ष नितीश ने कहा, "हमने यूजीसी को ऐसे नियम लाने के लिए मजबूर किया ताकि जवाबदेही तय हो।"
उन्होंने कहा, "इन दिशानिर्देशों पर लगी रोक यह साफ दिखाती है कि हमारे संस्थानों में उच्चतम स्तरों में आज भी जातिवाद गहराई से जड़ें जमाए हुए है। जब तक वास्तविक समानता हासिल नहीं होती, हम चैन से नहीं बैठेंगे।"
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