Press Trust of India | February 2, 2026 | 03:38 PM IST | 2 mins read
अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि यदि केंद्र सरकार 6 फरवरी तक अधिनियम को वापस नहीं लेती है तो वह 7 फरवरी को सवर्ण समाज के संगठनों के साथ दिल्ली में आंदोलन करेंगे।

वाराणसी: बरेली के नगर मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने के बाद सुर्खियों में आए 2019 बैच के प्रांतीय प्रशासनिक सेवा (पीसीएस) अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने घोषणा की कि यदि केंद्र सरकार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम वापस नहीं लेती है तो वह 7 फरवरी से दिल्ली में सवर्ण समाज के संगठनों के साथ आंदोलन करेंगे।
इस्तीफा देने के बाद यूपी सरकार द्वारा निलंबित किए गए पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री रविवार शाम वाराणसी के केदार घाट स्थित श्रीविद्या मठ पहुंचे, जहां उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया।
पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि यदि केंद्र सरकार 6 फरवरी तक एससी-एसटी अधिनियम को वापस नहीं लेती है तो वह 7 फरवरी को सवर्ण समाज के संगठनों के साथ दिल्ली में आंदोलन करेंगे।
शंकराचार्य से मुलाकात को लेकर पूछे गए सवाल पर अग्निहोत्री ने कहा कि कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे पहले शंकराचार्य ने उन्हें प्रयागराज में मिलने के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन समय के अभाव में वह नहीं जा सके थे।
काशी आगमन के दौरान उन्हें शंकराचार्य से मुलाकात का अवसर मिला। अग्निहोत्री ने कहा, ''विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर लोगों में आक्रोश है और सरकार का बड़ा मतदाता वर्ग इससे नाराज है।''
उन्होंने एससी/एसटी अधिनियम को 1989 में लागू किया गया देश का "सबसे काला कानून" करार देते हुए दावा किया कि इससे 85 प्रतिशत लोग प्रभावित हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि एससी/एसटी कानून के 95 प्रतिशत मामले फर्जी होते हैं और पूरे देश के सवर्ण समाज के संगठन उनके साथ खड़े हैं।
यूपी सरकार ने बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को अनुशासनहीनता के आरोप में 26 जनवरी की देर रात निलंबित कर दिया था। इससे पहले उन्होंने 26 जनवरी को दिन में पद से इस्तीफा दे दिया था, जिससे पूरा विवाद खड़ा हुआ।
सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने फेसबुक और एक्स पर अपने घर के बाहर पोस्टर पकड़े हुए तस्वीरें पोस्ट कीं, जिन पर "यूजीसी रोलबैक" और "भारत शंकराचार्य और संतों का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा" जैसे नारे लिखे थे।
Santosh Kumar