Santosh Kumar | February 12, 2026 | 09:54 PM IST | 1 min read
प्रधान ने कहा कि एआई को सर्वोत्तम प्रथाओं को जिम्मेदारी से अपनाने और नवीन वितरण मॉडल के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सार्वजनिक सेवाओं जैसे क्षेत्रों में परिणामों में सुधार करना चाहिए।

नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कृत्रिम मेधा (एआई) पर 3 नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत की, जिन्हें भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), लखनऊ द्वारा पेश किया जाएगा। धर्मेंद्र प्रधान ने 'भारत बोधन एआई कॉन्क्लेव' के दौरान इसकी घोषणा की।
उन्होंने कहा, "भारत को एआई के क्षेत्र में ग्लोबल लीडर बनना है। मैं मैनेजमेंट संस्थानों की पहल की सराहना करता हूं जो मैनेजमेंट शिक्षा, इनोवेशन और रियल-वर्ल्ड सामाजिक एप्लीकेशन में एआई को इंटीग्रेट करने में लीड ले रहे हैं।"
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने आगे कहा कि यह छात्रों को एआई बदलावों के मद्देनजर भविष्य के लिए तैयार करेगा, साथ ही यह सुनिश्चित करेगा कि प्रौद्योगिकी मानवीय मूल्यों और राष्ट्रीय विकास में योगदान दे।
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उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े युवा कार्यबल में से एक होने के नाते, भारत के पास दुनिया के लिए स्वदेशी एआई मॉडल और समाधान विकसित करने का एक अनूठा अवसर है।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि एआई को सर्वोत्तम प्रथाओं को जिम्मेदारी से अपनाने और नवीन वितरण मॉडल के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सार्वजनिक सेवाओं जैसे क्षेत्रों में परिणामों में सुधार करना चाहिए।
हाल ही में कैंपस में हुए इस रीयूनियन में 50 साल बाद देश और विदेश के पुराने छात्र इकट्ठा हुए। इस डोनेशन का मकसद इंस्टिट्यूट के खास एकेडमिक, रिसर्च और इंस्टीट्यूशनल कामों को मजबूत करना है।
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