राज्यसभा में युवाओं के पढ़ाई या नौकरी के लिए विदेश जाने और धोखाधड़ी का शिकार होने पर चिंता जताई गई
Press Trust of India | March 11, 2026 | 04:07 PM IST | 2 mins read
अशोक कुमार मित्तल ने कहा कि विदेशी यूनिवर्सिटी की प्रमाणिकता की जांच के लिए एजुकेशन पोर्टल बनाए जाने चाहिए ताकि इंस्टीट्यूट के बारे में पूरी जानकारी मिल सके।
नई दिल्ली: राज्यसभा में बुधवार को शून्यकाल के दौरान आम आदमी पार्टी के एक सदस्य ने विदेशों में जा कर अच्छी शिक्षा एवं रोजगार पाने के इच्छुक युवाओं के फर्जी आव्रजन एजेंसियों और विश्वविद्यालयों की जालसाजी के शिकार हो जाने पर चिंता जाहिर करते हुए सरकार से इस समस्या के समाधान के लिए एक स्थायी वैश्विक सुरक्षा प्रोटोकॉल बनाने तथा शिक्षा एवं रोजगार के लिए एक सत्यापित समर्पित पोर्टल बनाने की मांग की।
'आप' के डॉ अशोक कुमार मित्तल ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि विदेशों में अच्छी शिक्षा पाने के इच्छुक छात्र कई बार धोखाधड़ी के शिकार हो जाते हैं, तो कभी वे फर्जी आव्रजन एजेंसियों और फर्जी रोजगार एजेंसियों के चंगुल में फंस जाते हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले 5 सालों में चंडीगढ़ में इमिग्रेशन फ्रॉड के 733 मामले में 74 करोड़ रुपये की ठगी हुई।" सरकार ने जांच करके करीब 3,000 एजेंटों को गैर-कानूनी घोषित किया है। हालांकि, युवाओं को लुभाने का काम अभी भी जारी है।"
'20,000 भारतीय धोखाधड़ी का शिकार हुए'
मित्तल ने कहा कि दक्षिण-पूर्वी एशिया में 20 हजार भारतीय फर्जी आव्रजन और रोजगार एजेंसियों के शिकार होकर बंधक बनाकर अमानवीय हालात में रखे गए हैं। विदेश जाने के लिए कई युवाओं ने जमीन बेची या परिवार ने कर्ज लिया।
उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद 202 भारतीयों को रूसी सेना में भर्ती किया गया, जिनमें से 26 की मौत हो चुकी है। अमेरिका-इजराइल युद्ध के कारण उत्पन्न तनाव के बीच ओमान की खाड़ी में तेल टैंकर पर हमले में 2 भारतीय नाविक मारे गए।
'यूनिवर्सिटी की प्रमाणिकता जांचने के लिए पोर्टल'
मित्तल ने कहा कि परिवारों को मृतकों की बॉडी भी नहीं मिली। पश्चिम एशिया में संघर्ष की वजह से हवाई सक्षेत्रों में प्रतिबंध लग गया और वाणिज्यिक उड़ानें बंद हैं जिसके चलते करीब 12 हजार भारतीय संयुक्त अरब अमीरात में फंसे हुए हैं।
उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसी स्थिति के लिए एक स्थायी वैश्विक सुरक्षा प्रोटोकॉल बनाया जाए ताकि अपरिहार्य स्थिति में भारतीय अपने बारे में सूचना दे पाएं और उन्हें तत्काल जोखिम वाले स्थानों से निकाला जाए।
मित्तल ने कहा, "विदेशी यूनिवर्सिटीज की प्रमाणिकता की जांच के लिए शिक्षा संबंधी पोर्टल बनाया जाए। विदेशों में रोजगार के लिए भी सत्यापित एवं समर्पित पोर्टल बनाया जाए ताकि संस्थान या कंपनी के बारे में पूरी जानकारी मिल सके''
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