Social Media Ban: कर्नाटक में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लगा प्रतिबंध, सीएम ने की घोषणा
Press Trust of India | March 6, 2026 | 07:43 PM IST | 2 mins read
सिद्धरमैया ने 2026-27 के लिए राज्य का बजट पेश करते हुए कहा, “बच्चों पर मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग के प्रतिकूल प्रभावों को रोकने के उद्देश्य से, 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।”
नई दिल्ली: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने 6 मार्च को 16 वर्ष से कम आयु के लोगों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। इस फैसले का उद्देश्य बच्चों पर इसके प्रतिकूल प्रभावों को रोकना है। अभिभावकों के एक वर्ग ने हालांकि इस कदम का स्वागत किया, लेकिन वे इसके कार्यान्वयन की व्यावहारिकता को लेकर आशंकित हैं।
सिद्धरमैया ने 2026-27 के लिए राज्य का बजट पेश करते हुए कहा, “बच्चों पर मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग के प्रतिकूल प्रभावों को रोकने के उद्देश्य से, 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।” उन्होंने हालांकि यह नहीं बताया कि इसे कैसे लागू किया जाएगा।
इस साल जनवरी में कर्नाटक के इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियंक खरगे ने विधानसभा को सूचित किया था कि राज्य सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग, विशेष रूप से बच्चों के बीच, के लिए लागू किए जाने वाले उपायों के संबंध में परामर्श कर रही है।
केंद्र सरकार द्वारा इस वर्ष जनवरी में संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि डिजिटल लत से बचने के लिए ऑनलाइन शिक्षण को कम करने के साथ-साथ ऑनलाइन मंचों तक आयु-आधारित पहुंच पर विचार किया जाना चाहिए।
बेंगलुरु के जलाहल्ली निवासी मनोहर एन.एच. ने कहा कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाना कुछ मायनों में अच्छा हो सकता है, लेकिन इसे लागू करना मुश्किल होगा। मनोहर एन.एच. के दो बच्चे 16 वर्षीय बेटा और 13 वर्षीय बेटी हैं।
उन्होंने कहा, “आजकल कई स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाई ऐप्स के माध्यम से होती है। उदाहरण के लिए, माध्यमिक विद्यालय और प्राथमिक विद्यालय के छात्र-विशेषकर माध्यमिक विद्यालय के छात्र- कक्षाओं और संचार के लिए ऐप्स पर बहुत अधिक निर्भर हैं। सोशल मीडिया के उपयोग को नियंत्रित करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा, खासकर सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में। यह नियम लागू तो हो सकता है, लेकिन मुझे इसकी सफलता पर संदेह है; सफलता दर शायद केवल 10 प्रतिशत ही रहेगी।”
भाजपा के राज्यसभा सदस्य लहर सिंह सिरोया ने ‘एक्स’ पर एक सोशल मीडिया पोस्ट में इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने संसद में विशेष उल्लेख के माध्यम से इस मुद्दे को उठाया था।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री (नरेन्द्र) मोदी ने हाल ही में एआई शिखर सम्मेलन में हमारी युवा पीढ़ी के हितों की रक्षा करने की बात कही थी। मैंने संसद में अपने भाषण में बच्चों के बीच स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। मुझे उम्मीद है कि इस पर भी गंभीरता से विचार किया जाएगा।”
अगली खबर
]विशेष समाचार
]- हरियाणा के 23 जिलों में बनेंगे 90 आदर्श परीक्षा केंद्र, एचएसएससी अभ्यर्थियों को मिलेगी फ्री बस सुविधा
- Career Options After JEE: जेईई के बाद करियर के बेस्ट विकल्प क्या-क्या है? ट्रेंड्स जानें
- Rajasthan Budget 2026: एनटीए की तर्ज पर बनेगी स्टेट टेस्टिंग एजेंसी, भर्तियों का तोहफा; बजट में प्रमुख घोषणाएं
- Pariksha Pe Charcha 2026: स्वयं को तकनीक का गुलाम न बनाएं, क्षमता बढ़ाने में करें उपयोग- छात्रों से पीएम मोदी
- Budget 2026: 15,000 स्कूलों में कंटेंट क्रिएटर लैब, हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल, बजट पर लोगों के रिएक्शन जानें
- UGC Act 2026: यूजीसी के नए रेगुलेशन के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा, नियमों को बताया दमनकारी
- Coaching Reforms: कक्षा 11 के स्तर पर प्रवेश परीक्षाएं कराने की संभावना तलाश रहा केंद्र, अधिकारी ने दी जानकारी
- MP School News: मध्य प्रदेश में 200 सांदीपनि विद्यालयों के लिए 3,660 करोड़ रुपये स्वीकृत, मंत्री ने की घोषणा
- VBSA Bill: लोकसभा ने 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक' को संयुक्त समिति को भेजने की दी मंजूरी, जानें महत्व
- Govt in Lok Sabha: केवीएस में 10,173 पद रिक्त; 2014 से भर्ती और कॉन्ट्रैक्ट टीचरों का साल-वार विवरण जारी