दिल्ली यूनिवर्सिटी कार्यकारी परिषद ने विरोध के बीच ‘सेमेस्टर अवे प्रोग्राम’ व सीधे पीएचडी प्रवेश को दी मंजूरी

Press Trust of India | July 31, 2026 | 07:19 AM IST | 1 min read

ये फैसले वीसी प्रोफ़ेसर योगेश सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए। यूनिवर्सिटी ने पहले यूजीसीएफ-2022 के तहत प्रस्तावित 'सेमेस्टर अवे प्रोग्राम' (एसएपी) पर विचार किया था और एकेडमिक काउंसिल में भी इस पर चर्चा हुई।

परिषद ने चार साल के स्नातक (यूजी) पाठ्यक्रम से सीधे पीएचडी में दाखिले को भी मंजूरी दे दी। (प्रतीकात्मक-विकिमीडिया कॉमन्स)

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की कार्यकारी परिषद ने बृहस्पतिवार को विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर स्नातक छात्रों के लिए 'सेमेस्टर अवे प्रोग्राम' शुरू करने को मंजूरी दे दी। साथ ही, परिषद ने चार साल के स्नातक (यूजी) पाठ्यक्रम से सीधे पीएचडी में दाखिले को भी मंजूरी दे दी।

ये फैसले ऐसे समय में लिए गए, जब डीयू के कार्यकारी परिषद के निर्वाचित सदस्यों ने इन प्रस्तावों पर चिंता जताई और आशंका व्यक्त की कि इससे विश्वविद्यालय की डिग्रियों की गरिमा और मान्यता कमजोर हो सकती है।

ये फैसले वीसी प्रोफ़ेसर योगेश सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए। यूनिवर्सिटी ने पहले यूजीसीएफ-2022 के तहत प्रस्तावित 'सेमेस्टर अवे प्रोग्राम' (एसएपी) पर विचार किया था और एकेडमिक काउंसिल में भी इस पर चर्चा हुई।

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इससे पहले, 4 वर्षीय स्नातक पूरा करने वाले छात्रों को सीधे पीएचडी में प्रवेश देने के फैसले पर शिक्षकों के बीच मतभेद सामने आए। कुछ शिक्षकों ने इसे सही बताया जबकि कुछ ने कहा की इससे शोध की बुनियाद कमजोर हो सकती है।

अकादमिक परिषद के संशोधित पीएचडी नियमों के तहत पात्र 4 वर्षीय स्नातक छात्र सीधे पीएचडी में प्रवेश ले सकेंगे। हालांकि, शिक्षकों का कहना है कि मास्टर डिग्री को दरकिनार करने से शोध की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

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