Press Trust of India | September 17, 2026 | 09:37 PM IST | 3 mins read
पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र के नाम पर ''आपराधिक'' व्यवहार उचित नहीं ठहराया जा सकता। उसने पुलिस और डीयू से वस्तु स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव प्रचार के दौरान हिंसा और गुंडागर्दी की कथित घटनाओं पर कड़ी नाराजगी जताई तथा चेतावनी दी कि अगर अधिकारियों ने इस ''उद्दंड व्यवहार'' के लिए संतोषजनक कार्रवाई नहीं की, तो वह मतगणना और नतीजों की घोषणा पर रोक लगा देगा। डुसू चुनाव के लिए कल मतदान होना है और मतगणना 19 सितंबर को की जाएगी। बुधवार को चुनाव प्रचार खत्म हो गया। अदालत ने कहा कि अलग-अलग छात्र संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील शुक्रवार को सुनवाई के दौरान पेश हों।
मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र के नाम पर ''आपराधिक'' व्यवहार उचित नहीं ठहराया जा सकता। उसने पुलिस और डीयू से वस्तु स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।
पीठ ने कहा, ''हम चुनाव पर रोक नहीं लगा रहे हैं, लेकिन अगर हम आपके काम से संतुष्ट नहीं हुए, तो कल हम और कड़ा आदेश दे सकते हैं, जिसमें मतगणना और चुनाव परिणाम की घोषणा पर रोक लगाना भी शामिल है।''
उच्च न्यायालय ने कहा, ''जब तक ऐसे कड़े आदेश नहीं दिए जाते, कोई भी बात मानने को तैयार नहीं होगा। अगर आप स्थिति को संभालने में असमर्थ हैं, तो कृपया हमें बताएं। हमें पता है कि इसे कैसे करना है। इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती।''
वकील प्रशांत मनचंदा ने कहा कि बुधवार का दिन डूसू चुनावों के इतिहास का ''सबसे काला दिन'' था, जब कुछ लोगों ने डीयू के उत्तरी परिसर इलाके पर कब्जा कर लिया और प्राध्यापकों व छात्रों की पिटाई की गई।
मनचंदा, जिनकी डूसू चुनावों से जुड़ी याचिका अदालत में लंबित है, ने कहा कि उन्हें शिक्षकों और छात्रों से मोबाइल फोन पर संदेश मिले हैं, जिनमें कहा गया है कि बंदूक के जोर पर पूरे परिसर पर कब्जा कर लिया गया है।
मनचंदा ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार के दौरान हिंसा, बाहरी लोगों के आने-जाने जैसी घटनाएं हुईं। साथ ही, नियमों का उल्लंघन करते हुए महंगी गाड़ियों के काफिले देखने को मिले, जिनमें बिना पंजीकरण संख्या वाली गाड़ियां भी थीं।
अदालत ने कहा कि डीयू में चुनाव प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने और लिंगदोह समिती की रिपोर्ट में उल्लेखित सिफारिशों तथा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने में अधिकारी और छात्र नाकाम रहे।
अदालत ने पाया कि वीडियो फुटेज में बिना नंबर प्लेट वाली कारें दिखीं और उम्मीदवारों के आधिकारिक हैंडल पर आपत्तिजनक तस्वीरें भी पोस्ट की गई थीं। कोर्ट ने कहा, छात्र अपने ही शिक्षकों की पिटाई कर रहे हैं और बंदूकें लहरा रहे हैं।
आप (डीयू) बस इतना कहते हैं कि आप कुछ भी नियंत्रित नहीं कर सकते। हम चुनाव रद्द कर देंगे। अगर आप नियंत्रित नहीं कर सकते, तो अपनी नौकरी छोड़ दें। आपकी अपनी बेटी और मेरी भतीजी उत्तर परिसर में पढ़ रही हैं। उनका क्या होगा?''
केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने भरोसा दिलाया कि ''घिनौनी'' हरकतों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है तथा गिरफ्तारियां भी की जाएंगी।
छात्र संगठनों ने कहा कि छात्रों को असुरक्षित पीजी बंद करके बेघर न किया जाए। असुरक्षित या अनधिकृत आवास खाली कराने की स्थिति में छात्रों के लिए तत्काल वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की जाए।
Abhay Pratap Singh