Satya Niketan PG: छात्र संगठनों ने सुरक्षित-किफायती हॉस्टल की मांग की, सर्वे में सामने आई छात्रों की स्थिति
छात्र संगठनों ने कहा अवैध निर्माण, क्षमता से अधिक छात्रों को रखने और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई हो तथा लापरवाही करने वाले संबंधित अधिकारियों की भी जवाबदेही तय हो।
नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली स्थित सत्य निकेतन पीजी की पांच मंजिला इमारत गिरने से छात्रों की मौत मामले में छात्र संगठनों एसएफआई, डीवाईएफआई, डीटीई, एआईडीडब्ल्यूए और सीआईटीयू ने छात्रों के लिए सुरक्षित और किफायती हॉस्टल की मांग की है। इस दौरान संगठनों पीजी में रह रहे 117 छात्रों के साथ प्राथमिक सर्वे भी किया।
छात्र संगठनों ने बताया कि ये छात्र कम से कम 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस व आस-पास के कॉलेज में पढ़ते हैं। सर्वेक्षण में सामने आया कि संबंधित कॉलेजों में पर्यापत छात्रावास की सुविधा नहीं है।
सर्वे में कहा गया कि, पीजी का किराया 5000 से 30000 रुपये प्रति माह है। मालिक मनमाने ढंग से किराया तय करते हैं। भोजन सहित डबल शेयरिंग कमरे का औसत किराया लगभग 14000 रुपये है। छात्रो ने दीवारों में दरार खराब कूलिंग सिस्टम और महीनों मरम्मत न होने की शिकायत की है।
छात्रों ने पीजी के बजाय विश्वविद्यालय या कॉलेज हॉस्टल को दी प्राथमिकता -
- आगे कहा गया, बिजली के लिए छात्रों से 11 से 15 रुपये प्रति यूनिट वसूला जाता है। 66 प्रतिशत छात्रों ने पीजी के बजाय विश्वविद्यालय या कॉलेज हॉस्टल को प्राथमिकता दी। इमारत गिरने के बाद 79 प्रतिशत छात्रों ने सत्य निकेतन में रहना जारी रखने को लेकर डर व्यक्त किया है।
- एमसीडी के हालिया सर्वे में सामने आया कि दिल्ली के 99 प्रतिशत पीजी में फायर सेफ्टी क्लीयरेंस नहीं है और 70 प्रतिशत से अधिक के पास आवश्यक लेआउट प्लान की स्वीकृति नहीं है।
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छात्र संगठनों ने कहा कि हादसे के बाद कुछ पीजी सील करना पर्याप्त नहीं है। हर पीजी का पंजीकरण हो, उसकी सुरक्षा की नियमित जांच व निगरानी हो और छात्रों की शिकायों का समाधान हो। साथ ही, नियमों का उल्लंघन होने पर जिम्मेदारी तय की जाए। छात्र प्रतिनिधियों की भागीदारी के साथ स्वतंत्र और पारदर्शी नियामक व्यवस्थान बनाई जाई।
छात्र संगठनों की प्रमुख मांगें -
- मृतक के आश्रितों को 1 करोड़ रुपये और घायलों को 2 से 5 लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा।
- शिक्षा के लिए ग्रांट बढ़ाई जाए और HEFA जैसे ऋण-आधारित मॉडल पर निर्भरता कम की जाए। विश्वविद्यालयों में हॉस्टल क्षमता छात्र संख्या के अनुपात में चरणबद्ध ढंग से बढ़ाई जाए।
- दिल्ली में छात्र आवास, पीजी के नियम के लिए प्रभावी कानून बनाया और तत्काल लागू किया जाए। भवन की संरचनात्मक सुरक्षा, फायर सेफ्टी, स्वच्छता, पानी, बिजली, अधिकतम क्षमता, किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट आदि के स्पष्ट मानक तय हों।
- एक सार्वजनिक Student Accommodation Monitoring System बनाया जाए। प्रत्येक पंजीकृत पीजी की सुरक्षा स्थिति, स्वीकृत क्षमता और अन्य आवश्यक जानकारी ऑनलाइन सार्वजनिक हो। छात्रों की शिकायतों के लिए स्वतंत्र और प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था तथा हेल्पलाइन हो।
- Delhi Student Accommodation Monitoring and Regulatory Authority जैसी स्वतंत्र व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें दिल्ली सरकार, MCD, विश्वविद्यालय, UGC/शिक्षा मंत्रालय, फायर विभाग, विशेषज्ञों के साथ छात्रों, शिक्षकों, युवाओं और मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।