Press Trust of India | July 28, 2026 | 09:30 AM IST | 2 mins read
अकादमिक परिषद के संशोधित पीएचडी नियमों के तहत पात्र 4 वर्षीय स्नातक छात्र सीधे पीएचडी में प्रवेश ले सकेंगे। हालांकि, शिक्षकों का कहना है कि मास्टर डिग्री को दरकिनार करने से शोध की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) द्वारा 4 वर्षीय स्नातक (एफवाईयूपी) पूरा करने वाले छात्रों को सीधे पीएचडी में प्रवेश देने के फैसले पर शिक्षकों के बीच मतभेद उभर आए हैं। कुछ शिक्षकों ने इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप प्रगतिशील कदम बताया है, जबकि अन्य ने चेतावनी दी है कि इससे शोध की बुनियाद कमजोर हो सकती है और प्रवेश प्रक्रिया में अस्पष्टता पैदा हो सकती है।
अकादमिक परिषद के संशोधित पीएचडी नियमों के तहत पात्र 4 वर्षीय स्नातक छात्र सीधे पीएचडी में प्रवेश ले सकेंगे। हालांकि, शिक्षकों का कहना है कि मास्टर डिग्री को दरकिनार करने से शोध की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
मिरांडा हाउस की शिक्षिका आभा देव हबीब ने कहा कि विशेष शोध में प्रवेश से पहले स्नातकोत्तर शिक्षा किसी विषय की अवधारणात्मक समझ को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने कहा, "पीएचडी शोध के दायरे को सीमित करती है। यह विषय की बुनियाद मजबूत नहीं करती। स्नातकोत्तर शिक्षा विषय की मजबूत नींव देती है, जिससे बाद में शोध के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने की स्वतंत्रता मिलती है।"
हबीब ने कहा कि विश्वविद्यालय बिना विचार किए बदलाव कर रहा है। उनके अनुसार, भविष्य में सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति में मास्टर और पीएचडी दोनों डिग्री रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता मिलने की संभावना अधिक रहेगी।
देशबंधु कॉलेज के प्रोफेसर बिस्वजीत मोहंती ने कहा कि प्रस्ताव का में कई व्यावहारिक कमियां हैं। उन्होंने कहा कि नेट के जरिए आने वाले छात्रों और स्नातक के बाद सीधे पीएचडी में प्रवेश पाने वालों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा होगी।
रामजस कॉलेज के प्राचार्य अजय कुमार अरोड़ा ने कहा कि यह व्यवस्था एनईपी की उस अवधारणा के अनुरूप है, जिसमें छात्रों को शैक्षणिक प्रगति के कई विकल्प दिए गए हैं।
किरोड़ीमल कॉलेज के प्राचार्य दिनेश खट्टर ने कहा कि एफवाईयूपी के पहले बैच के 28 छात्रों ने शोधपत्र प्रकाशित किए हैं, जिनमें से 10 के शोधपत्र स्कोपस सूचीबद्ध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। उनके अनुसार, नया प्रावधान गुणवत्तापूर्ण शोध को और प्रोत्साहित करेगा।
डीयू की डीन, प्रवेश, हनीत गांधी ने कहा कि स्कोपस सूचीबद्ध शोधपत्र प्रकाशित करने वाले पात्र छात्रों को अलग श्रेणी के तहत सीधे पीएचडी में प्रवेश दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि एक वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रम में सीटें बढ़ाने की संभावना पर विचार के लिए एक समिति गठित की गई है।