विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों पर राहुल के आरोपों पर धर्मेंद्र प्रधान का पलटवार, बोले- झूठ की राजनीति करते हैं
Santosh Kumar | July 25, 2025 | 09:49 PM IST | 2 mins read
मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में, ओबीसी पदों को अक्सर "अनुपयुक्त" घोषित कर दिया जाता था और फिर सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को दे दिया जाता था।
नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित संकाय पदों को खाली रखने संबंधी राहुल गांधी की टिप्पणी पर शुक्रवार (25 जुलाई) को पलटवार किया और कहा कि कांग्रेस नेता हमेशा झूठ की राजनीति करते रहे हैं।
इससे पहले दिन में राहुल गांधी ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों में रिक्त आरक्षित पदों को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला और इसे न केवल लापरवाही बल्कि ‘बहुजनों’ को शिक्षा, शोध और नीतियों से दूर रखने की एक ‘‘सुनियोजित साजिश’’ बताया।
राहुल गांधी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा कि ये बातें पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि सभी रिक्त पदों को तुरंत भरा जाना चाहिए और बहुजनों को उनका अधिकार मिलना चाहिए।
ईश्वर कांग्रेस पार्टी को सद्बुद्धि दें: प्रधान
धर्मेंद्र प्रधान ने संवाददाताओं से कहा ‘‘जिन लोगों ने देश में आम लोगों और गरीबों के खिलाफ राजनीति की है, उनके दिलों में जहर है। जिनके दिलों में जहर है उन्हें पूरे देश में जहर ही दिखाई देगा। ईश्वर कांग्रेस पार्टी को सद्बुद्धि दें।’’
उन्होंने कहा, राहुल गांधी ने हमेशा झूठ की राजनीति की है। मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में, ओबीसी पदों को अक्सर "अनुपयुक्त" घोषित कर दिया जाता था और फिर सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को दे दिया जाता था।
उन्होंने यह भी कहा कि राहुल और उनकी पार्टी हाशिए पर पड़े वर्गों के खिलाफ रही है। प्रधान ने कहा, "हमने अपने कार्यकाल में पदों की संख्या बढ़ाई है और अब पहले से ज़्यादा संख्या में ओबीसी उम्मीदवारों को नौकरियां मिल रही हैं।"
प्रधान ने एक्स पोस्ट में लिखा, "राहुल गांधी की समझ समाज जीवन के साधारण विषयों में भी कमजोर है। उन्हें लगता है कि उनके परिवार ने कांग्रेस पार्टी में जो नियम लागू किए हैं, वही नियम सरकारी सेवाओं में नियुक्तियों के लिए भी लागू हैं।"
उन्होंने लिखा, "सरकारी सेवाओं में नियुक्ति और पदोन्नति के नियम होते हैं। जो असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त होता है, वह एक समयावधि के बाद प्रोफेसर बन जाता है। जवाब दीजिए कि आपने अपनी सरकार में एससी-एसटी और ओबीसी का असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर अधिकार क्यों छीना?
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