Bihar News: बिहार विधान परिषद् सचिवालय ने जारी किया सिक्योरिटी गार्ड पीईटी का रिजल्ट, कुल 309 अभ्यर्थी सफल

Saurabh Pandey | May 22, 2026 | 08:42 PM IST | 2 mins read

बिहार विधान परिषद् सचिवालय ने सुरक्षा प्रहरी पद की शारीरिक और माप जांच परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया है, जिसमें कुल 309 उम्मीदवार सफल हुए हैं। कम ऊंचाई के कारण बाहर हुए 22 अभ्यर्थी अपनी शिकायत के निवारण के लिए 27 मई 2026 को आवश्यक दस्तावेजों के साथ दोबारा जांच के लिए उपस्थित हो सकते हैं।

इस परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर ही अगले चरण (साक्षात्कार) के लिए सफल अभ्यर्थियों का रोलनंबरवाइज रिजल्ट जारी किया गया है। (आधिकारिक वेबसाइट)

नई दिल्ली : बिहार विधान परिषद् सचिवालय ने सुरक्षा प्रहरी के पदों पर सीधी भर्ती के लिए आयोजित की गई शारीरिक माप जांच और शारीरिक योग्यता (RFID आधारित दौड़) परीक्षा का परिणाम आधिकारिक तौर पर घोषित कर दिया है। इस परीक्षा में कुल 309 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया है, जो अब अगले चरण के इंटरव्यू (Interview) प्रक्रिया में शामिल होंगे। इसके साथ ही सचिवालय ने कम ऊंचाई के कारण अनुत्तीर्ण हुए अभ्यर्थियों को शिकायत दर्ज कराने का एक आखिरी मौका भी दिया है।

बिहार विधान परिषद् सचिवालय सुरक्षा प्रहरी के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए पहले चरण की शारीरिक माप जांच और शारीरिक योग्यता (RFID आधारित दौड़) जांच परीक्षा का आयोजन 21 अप्रैल 2026 से 28 अप्रैल 2026 तक किया गया था। इस परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर ही अगले चरण (साक्षात्कार) के लिए सफल अभ्यर्थियों का अनुक्रमांकवार परीक्षाफल प्रकाशित किया गया है।

ऊंचाई में कम पाए जाने वाले उम्मीदवारों को मौका

दौड़ परीक्षा में सफल होने के बावजूद, निर्धारित शारीरिक मापदंड के अनुसार न्यूनतम आवश्यक ऊंचाई न होने के कारण कुल 8 पुरुष और 14 महिला अभ्यर्थियों को अनुत्तीर्ण घोषित किया गया है। ऐसे अनुत्तीर्ण अभ्यर्थी, जिन्हें अपनी ऊंचाई माप से संबंधित कोई आपत्ति या शिकायत है, वे सक्षम प्राधिकार द्वारा जारी अपने सिविल ऊंचाई प्रमाण-पत्र के साथ 27 मई 2026 को सुबह 10 बजे बिहार विधान परिषद् सचिवालय में शारीरिक माप जांच के लिए दोबारा उपस्थित हो सकते हैं। अभ्यर्थियों को अपने साथ शारीरिक योग्यता परीक्षा का एडमिट कार्ड और एक वैध पहचान-पत्र लाना अनिवार्य होगा।

त्रुटियों के लिए उम्मीदवार स्वयं जिम्मेदार

सचिवालय द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन भरते समय उम्मीदवारों द्वारा दर्ज की गई आरक्षण कोटि, लिंग और जन्म तिथि जैसी प्रविष्टियों के आधार पर ही उन्हें परीक्षाफल में शामिल किया गया है। इसमें किसी भी प्रकार की गलती या त्रुटि के लिए उम्मीदवार स्वयं जिम्मेदार होंगे। इसके अलावा, यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल प्रारंभिक या शारीरिक परीक्षा में सफलता पाने से ही किसी अभ्यर्थी की दावेदारी पक्की नहीं होती है; सभी चरणों में अभ्यर्थियों की योग्यता की समीक्षा करने के बाद अंतिम निर्णय लेने का अधिकार बिहार विधान परिषद् सचिवालय के पास सुरक्षित रहेगा।

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RFID क्या होता है?

रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) एक आधुनिक वायरलेस (बिना तार की) तकनीक है, जिसका उपयोग किसी वस्तु, व्यक्ति या जानवर की पहचान करने और उसकी ट्रैकिंग करने के लिए किया जाता है।

भर्ती परीक्षाओं और दौड़ में इसका क्या इस्तेमाल है?

  1. "RFID आधारित दौड़", इसका मतलब है कि दौड़ के दौरान पारदर्शिता रखने और बिल्कुल सटीक समय नापने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है-
  2. सटीक समय की गणना - दौड़ शुरू करने से पहले उम्मीदवारों के सीने पर या पैरों में एक RFID चिप (टैग) बांध दी जाती है।
  3. डिजिटल ट्रैकिंग - जैसे ही उम्मीदवार दौड़ना शुरू करता है और फिनिशिंग लाइन या ट्रैक पर लगे मैट (जिसमें रीडर होता है) के ऊपर से गुजरता है, कंप्यूटर अपने आप रिकॉर्ड कर लेता है कि उसने दौड़ कितने सेकंड या मिनट में पूरी की।
  4. पारदर्शिता - इससे इंसानी गलती (जैसे स्टॉपवॉच दबाने में देरी) या किसी भी तरह की धोखाधड़ी की गुंजाइश खत्म हो जाती है।
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