BHU: अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति भर्ती की सामान्य प्रक्रिया का एक अपवाद है - इलाहाबाद उच्च न्यायालय
Press Trust of India | January 22, 2026 | 12:18 PM IST | 2 mins read
अदालत ने 16 जनवरी को दिए अपने निर्णय में कहा, “अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य एक परिवार की रोजी रोटी कमाने वाले अकेले व्यक्ति के निधन से पैदा हुई मुश्किलों को दूर करना है।”
प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति भर्ती की सामान्य प्रक्रिया का अपवाद है और अनुकंपा नियुक्ति के उद्देश्य को विफल करने के लिए भर्ती नियमों पर अनुचित भरोसा नहीं किया जा सकता है। इस टिप्पणी के साथ अदालत ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय को याचिकाकर्ता के आवेदन पर एक महीने के भीतर कानून के मुताबिक नए सिरे से निर्णय करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने भर्ती नियमों में निर्धारित आयु सीमा को लागू किए बगैर लेकिन अनुकंपा नियुक्ति नियमों में उपलब्ध छूट के आधार पर प्रतिवादी- उम्मीदवार के दावे पर विचार करने का भी विश्वविद्यालय को निर्देश दिया।
इस मामले के तथ्यों के मुताबिक, प्रतिवादी की बहन का इस विश्वविद्यालय में नौकरी के दौरान निधन हो गया था। इसके बाद प्रतिवादी ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया जिसे खारिज कर दिया गया। इस निर्णय के खिलाफ उसने अदालत से संपर्क किया। एकल न्यायाधीश की पीठ ने उसकी याचिका स्वीकार कर ली और विश्वविद्यालय को भर्ती नियमों को लागू किए बगैर याचिकाकर्ता के आवेदन पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया।
विश्वविद्यालय ने इस निर्णय के खिलाफ अपील की। विश्वविद्यालय की दलील थी कि इस विश्वविद्यालय में अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े नियमों में भर्ती के नियम लागू होते हैं और इन नियमों में निर्धारित आयु सीमा 18 से 33 वर्ष है जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए तीन वर्ष की छूट शामिल है। याचिकाकर्ता की बहन के निधन के समय उसकी आयु 37 वर्ष थी जोकि अधिकतम अनुमान्य छूट से अधिक थी।
अदालत ने 16 जनवरी को दिए अपने निर्णय में कहा, “एक सार्वजनिक परीक्षा में लागू भर्ती के नियम सभी नागरिकों को समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए होते हैं, जबकि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य एक परिवार की रोजी रोटी कमाने वाले अकेले व्यक्ति के निधन से पैदा हुई मुश्किलों को दूर करना है।”
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