AIIMS Bilaspur Convocation 2026: राष्ट्रपति मुर्मू ने ग्रेजुएट्स से दूर-दराज इलाकों में सेवा करने की अपील की
Abhay Pratap Singh | October 7, 2026 | 12:44 PM IST | 2 mins read
राष्ट्रपति ने कहा - जब एक बीमार व्यक्ति चिकित्सक के पास आता है तब वह बीमारी से जुड़े डर और अनिश्चितता के साथ-साथ उम्मीद लेकर भी आता है।
नई दिल्ली: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, बिलासपुर (AIIMS Bilaspur) के प्रथम दीक्षांत समारोह में 6 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शामिल हुईं। अपने संबोधन में मुर्मू ने ग्रेजुएट्स से दूर-दराज और पिछड़े इलाकों में सेवा करने की अपील की। इस दौरान राष्ट्रपति ने 5 गोल्ड मेडलिस्ट को सम्मानित किया और दूसरे ग्रेजुएट्स को डिग्री प्रदान की।
द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि चिकित्सा पेशे का मुख्य उद्देश्य मानवता की सेवा करना होना चाहिए। चिकित्सकों की संवेदनशीलता और करुणापूर्ण व्यवहार बीमार व्यक्ति को हिम्मत देता है। उन्होंने डॉक्टरों से अपने पेशे में श्रेष्ठ बनने के साथ-साथ संवेदनशीलता और करुणा को भी अपनाने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि एम्स बिलासपुर अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण एक खास जिम्मेदारी निभाता है। हिमाचल प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने एम्स बिलासपुर को तृतीयक स्वास्थ्य सुविधा का अग्रणी केंद्र बनाने, टेलीमेडिसिन, परामर्श और नवीनतम तकनीक से पहाड़ी क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने पर जोर दिया।
मुर्मू ने कहा, देशवासियों को कम खर्च पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना सभी की जिम्मेदारी है। चिकित्सा उपकरणों और दवाइयों की बढ़ती कीमत मरीजों और उनके परिवारों के लिए एक गंभीर चुनौती है। किफायती, सुलभ और कम लागत वाले स्वास्थ्य सेवा समाधान विकसित करना एम्स जैसे अग्रणी संस्थानों के लिए चुनौती व अवसर दोनों हैं।
एम्स बिलासपुर के पहले दीक्षांत समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा, गवर्नर कविंदर गुप्ता, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और राज्य के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए। सभा को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा ने देश में मेडिकल शिक्षा के विस्तार पर जोर दिया।
उन्होंने बताया, मेडिकल कॉलेजों की संख्या 384 से बढ़कर 800 से अधिक हो गई है, जबकि अंडरग्रेजुएट मेडिकल सीटें 51,348 से बढ़कर 1.42 लाख हो गई हैं। समारोह में डॉक्टरों ने पारंपरिक कुर्ता-पायजामा और टोपी पहनकर अपनी डिग्री ली। इस ड्रेस कोड को एम्स प्रशासन ने पुरुषों और महिलाओं, दोनों के लिए अनिवार्य किया था।
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