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UPSC Mains Marks: केंद्रीय सूचना आयोग ने यूपीएससी मेंस के अंकों का विवरण प्रकाशित करने की सिफारिश की

Press Trust of India | September 25, 2026 | 09:19 AM IST | 2 mins read

यह मामला एक आरटीआई अर्जी से शुरू हुआ, जिसमें 2023 तक के 10 साल के दौरान सभी चयनित अभ्यर्थियों के सामान्य अध्ययन एवं वैकल्पिक विषय के पेपर और साक्षात्कार में मिले अंकों का तुलनात्मक आंकड़ा मांगा गया था।

सीआईसी ने कहा कि अंक बताने से अभ्यर्थियों को सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी। (प्रतीकात्मक-मैग्निफिक)
सीआईसी ने कहा कि अंक बताने से अभ्यर्थियों को सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी। (प्रतीकात्मक-मैग्निफिक)

नई दिल्ली: केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों को प्रत्येक पेपर में मिले अंकों का विवरण प्रकाशित करने की परंपरा फिर से शुरू करने की सिफारिश की है। सीआईसी ने पाया कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के पास 2018 से इस परंपरा को बंद करने के पीछे किसी भी औपचारिक निर्णय का कोई रिकॉर्ड नहीं था। यह सिफारिश, अंकों के विस्तृत विवरण रखने को लेकर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और डीओपीटी के विरोधाभासी रुख के बीच की गई है।

यूपीएससी ने सीआईसी को बताया कि अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद वह डीओपीटी और (मसूरी स्थित) लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी को अंकों का विस्तृत विवरण उपलब्ध करता है, जबकि डीओपीटी का कहना था कि अंकों का विवरण सिर्फ यूपीएससी ही तैयार करता है और अपने पास रखता है।

आरटीआई से मार्क्स जारी करने का मुद्दा उठा

यह मामला एक आरटीआई अर्जी से शुरू हुआ, जिसमें 2023 तक के 10 साल के दौरान सभी चयनित अभ्यर्थियों के सामान्य अध्ययन एवं वैकल्पिक विषय के पेपर और साक्षात्कार में मिले अंकों का तुलनात्मक आंकड़ा मांगा गया था।

आवेदक ने इस बारे में भी जानकारी मांगी थी कि अंकों के मामले में अलग-अलग वैकल्पिक विषय का प्रदर्शन कैसा रहा। आवेदक का तर्क था कि सिविल सेवा परीक्षा 2017 तक, चयनित अभ्यर्थियों के प्रश्नपत्र-वार अंक सार्वजनिक रूप से बताए जाते थे, वहीं 2018 से केवल कुल अंक ही उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे अभ्यर्थियों के लिए अलग-अलग वैकल्पिक विषयों में प्रदर्शन के रुझानों का आकलन करना मुश्किल हो गया है।

सीआईसी ने गौर किया कि आखिरी मौका दिए जाने के बावजूद, डीओपीटी 2018 से अंक प्रकाशित करना बंद करने की बात को साबित करने वाली कोई भी फाइल नोटिंग, कार्यालय ज्ञापन, नीतिगत निर्णय या कोई और रिकॉर्ड पेश नहीं कर पाया।

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UPSC Mains Marks: चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए अंक बताएं

सीआईसी ने कहा कि ''चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता'' सुनिश्चित करने के लिए अंकों के विवरण ''बताए जाने चाहिए'', क्योंकि अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के सभी 7 पेपर में से हर एक में कम से कम 10 प्रतिशत अंक हासिल करने होते हैं।

इसने कहा कि वैकल्पिक विषयों के अंक बताने से अभ्यर्थियों को सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी और यह सुनिश्चित हो सकेगा कि वे अलग-अलग विषयों में अभ्यर्थियों के प्रदर्शन की जानकारी के लिए ''अविश्वसनीय स्रोतों'' पर निर्भर न रहें।

सीआईसी ने डीओपीटी को निर्देश दिया कि वह आरटीआई आवेदक को सिविल सेवा परीक्षा 2018 से 2023 तक चयनित अभ्यर्थियों को सामान्य अध्ययन, वैकल्पिक विषय, व्यक्तित्व परीक्षण में प्राप्त विस्तृत अंक उपलब्ध कराए।

इसने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम की धारा 25(5) के तहत इस प्रक्रिया को फिर से शुरू करने के लिए एक परामर्श जारी करते हुए कहा कि 2018 से पहले इसका पालन किया जाता था और इसे ''बिना किसी नीतिगत निर्णय के'' बंद कर दिया गया था।

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