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जेएनयू में 'इमेरिटस' सम्मान पर बढ़ा विवाद: शिक्षक संघ ने 'प्रोफेसर इमेरिटस' के फैसले को सीवीसी में चुनौती दी

Saurabh Pandey | October 6, 2026 | 10:47 AM IST | 2 mins read

जेएनयू शिक्षक संघ (JNUTA) ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति ने नियमों की अनदेखी कर भ्रष्टाचार और उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे पूर्व प्रोफेसर पी. आर. कुमारस्वामी को सीवीसी (CVC) शिकायत के बावजूद 'प्रोफेसर इमेरिटस' का सर्वोच्च दर्जा देकर सम्मानित किया है।

जेएनयू की परंपरा के अनुसार, 'प्रोफेसर इमेरिटस' का पद असाधारण अकादमिक योगदान देने वाले विद्वानों को ही दिया जाता है।
जेएनयू की परंपरा के अनुसार, 'प्रोफेसर इमेरिटस' का पद असाधारण अकादमिक योगदान देने वाले विद्वानों को ही दिया जाता है।

नई दिल्ली : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में 'प्रोफेसर इमेरिटस' का दर्जा एक बार फिर प्रशासनिक और नैतिक विवाद के केंद्र में आ गया है। जेएनयू शिक्षक संघ (JNUTA) ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियमों की अनदेखी करते हुए इस सम्मान का इस्तेमाल शोध या अकादमिक योगदान को सराहने के लिए नहीं, बल्कि एक 'व्यक्तिगत संरक्षण' और प्रशासनिक सौदेबाजी के रूप में किया है।

शिक्षकों के इस समूह का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान (SIS) के पूर्व प्रोफेसर पी. आर. कुमारस्वामी को 'प्रोफेसर इमेरिटस' बनाए जाने का फैसला विश्वविद्यालय के अकादमिक मानकों का सीधा उल्लंघन है। संघ के मुताबिक यह पूरी कवायद संस्थागत ईमानदारी पर हमला है और यह दर्शाता है कि कैसे सर्वोच्च अकादमिक पदों को निजी स्वामिभक्ति का माध्यम बना दिया गया है।

JNU Emeritus Controversy: प्रोफेसर इमेरिटस सम्मान

जेएनयू की परंपरा के अनुसार, 'प्रोफेसर इमेरिटस' का पद असाधारण अकादमिक योगदान देने वाले विद्वानों को ही दिया जाता है। इतिहास में यह सम्मान जेएनयू के सैकड़ों सम्मानित और उत्कृष्ट प्रोफेसरों में से महज 15 चुनिंदा शख्सियतों को ही मिला है। इसके लिए केवल अकादमिक पहचान ही काफी नहीं होती, बल्कि 'निष्कलंक' संस्थागत सत्यनिष्ठा होना एक अनिवार्य शर्त मानी जाती है।

JNU Emeritus Controversy: शिक्षक संघ का दावा

शिक्षक संघ का दावा है कि 30 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्त हुए प्रो. कुमारस्वामी का कार्यकाल विवादों से घिरा रहा है। उन पर भ्रष्टाचार, सहयोगियों के उत्पीड़न, स्वैच्छिक अधिकारों के दुरुपयोग और सीवीसी (CVC) और यूजीसी (UGC) के नियमों के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप लंबित हैं। इसके बावजूद उन्हें सम्मानित किया जाना प्रशासनिक विशेषाधिकार के खुले दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।

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जेएनयू शिक्षक संघ (JNUTA) का आरोप है कि विश्वविद्यालय की कुलपति ने 30 सितंबर को बुलाई गई 330वीं कार्यकारी परिषद (EC) की बैठक में "अन्य मद" के तहत इस प्रस्ताव को अचानक पास करवा लिया। संघ के अनुसार, न तो बैठक के एजेंडे में और न ही नियम 32 के तहत आवश्यक दस्तावेज पेश किए गए, जो इस सम्मान की प्रक्रिया के लिए अनिवार्य हैं।

शिक्षक संघ का कहना है कि वीसी ने जांच बिठाने के बजाय आरोपों से घिरे प्रोफेसर का बचाव किया और उन्हें इस शीर्ष सम्मान से नवाजा।

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