उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने विलय के नाम पर 22,000 प्राथमिक स्कूल बंद किए - पूर्व सीएम अखिलेश यादव

Press Trust of India | July 29, 2026 | 08:31 AM IST | 3 mins read

अखिलेश ने दावा किया कि इंटरमीडिएट विद्यालयों, पॉलिटेक्निक संस्थानों और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में प्रवेश घट रहे हैं।

सपा प्रमुख ने कहा - सरकार को बताना चाहिए कि वर्ष 2024 में कानून बनने के बाद नीट का प्रश्नपत्र कैसे लीक हुआ। (इमेज-आधिकारिक एक्स/अखिलेश यादव)

नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष व यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में भाजपा नीत सरकार पर तीखा हमला करते हुए मंगलवार को आरोप लगाया कि उसने स्कूलों के विलय के नाम पर हजारों प्राथमिक विद्यालय बंद कर दिए हैं और इससे वंचित वर्गों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने हालांकि इन आरोपों को ‘निराधार’ बताते हुए कहा कि सरकार ने कोई भी सरकारी प्राथमिक विद्यालय बंद नहीं किया है। उन्होंने कहा कि केवल कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों का निकटवर्ती स्कूलों में विलय किया गया है।

लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 -

लोकसभा में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि केंद्र और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकारें शिक्षा व्यवस्था में सुधार के बार-बार दावे करने के बावजूद इसमें सुधार करने में विफल रही हैं। देशभर में एक लाख से अधिक प्राथमिक विद्यालय बंद किए गए हैं, जिनमें सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में हैं। उन्होंने कहा, “भाजपा सरकार ने उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक प्राथमिक विद्यालय बंद किए हैं। बड़ी संख्या में माध्यमिक विद्यालय भी बंद किए गए हैं।”

राज्य में विलय के नाम पर लगभग 22,000 प्राथमिक विद्यालय बंद कर दिए गए -

संसद परिसर के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप दोहराते हुए दावा किया कि राज्य में विलय के नाम पर लगभग 22,000 प्राथमिक विद्यालय बंद कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “देशभर में प्राथमिक विद्यालय बंद किए जा रहे हैं, लेकिन सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में करीब 22,000 विद्यालय बंद हुए हैं। चाहे इसे विलय का नाम दिया जाए, लेकिन स्कूल तो बंद हुए हैं। ऐसे बड़ी संख्या में विद्यालय मुख्यमंत्री के गृह जिले गोरखपुर में भी हैं।” अखिलेश ने दावा किया कि इंटरमीडिएट विद्यालयों, पॉलिटेक्निक संस्थानों और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में प्रवेश घट रहे हैं।

Also read Paper Leak: पेपर लीक आतंकवाद और नक्सलवाद से बड़ी समस्या, सरकार इसका खात्मा करेगी - अनुराग ठाकुर

भाजपा सरकार रोजगार उपलब्ध कराने के प्रति प्रतिबद्ध नहीं -

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार रोजगार उपलब्ध कराने और आरक्षण की रक्षा करने के प्रति प्रतिबद्ध नहीं है। उन्होंने 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती में भी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और दलित अभ्यर्थियों को उनका उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला, जबकि वे अदालतों का रुख कर चुके हैं और विरोध प्रदर्शन भी कर चुके हैं। सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन को लेकर सरकार को निशाने पर लेते हुए यादव ने प्रश्नपत्र लीक रोकने संबंधी कानून में एक और संशोधन की आवश्यकता पर सवाल उठाया।

वर्ष 2024 में कानून बनने के बाद नीट का प्रश्नपत्र कैसे लीक हुआ -

सपा प्रमुख ने कहा, “सरकार को बताना चाहिए कि वर्ष 2024 में कानून बनने के बाद नीट का प्रश्नपत्र कैसे लीक हुआ और छात्रों को 2026 में फिर आंदोलन क्यों करना पड़ा?” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासन के दौरान उत्तर प्रदेश में भर्ती और बोर्ड परीक्षाओं सहित 20 से अधिक परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं। बाद में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव के आरोप तथ्यों के विपरीत हैं। बेसिक शिक्षा मंत्री ने वीडियो बयान में कहा, “मैं अखिलेश यादव के बयान को तथ्यों के आधार पर चुनौती देता हूं। उत्तर प्रदेश सरकार ने बेसिक शिक्षा परिषद के किसी भी विद्यालय को बंद करने का निर्णय नहीं लिया है। सभी सरकारी विद्यालय संचालित हो रहे हैं।”

सरकार ने केवल कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों का निकटवर्ती स्कूलों में विलय किया -

उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों का निकटवर्ती स्कूलों में विलय किया है, जबकि खाली हुए भवनों का उपयोग पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं और 'बाल वाटिकाओं' के संचालन के लिए किया जा रहा है। सिंह ने कहा, “अखिलेश यादव जानते हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में सरकार नहीं बनाएगी। इसलिए वह जनता को गुमराह करने के लिए निराधार बयान दे रहे हैं।” उन्होंने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ा है, विद्यालय छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या घटी है और बुनियादी ढांचे में सुधार हुआ है।

MakeCAREERS360
My Trusted Source
Add as a preferred source on google
[

विशेष समाचार

]
[

नवीनतम शिक्षा समाचार

]