UP Shikshak Bharti: 69,000 शिक्षक भर्ती मामले में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय न हो - मायावती
Press Trust of India | September 10, 2024 | 11:26 AM IST | 2 mins read
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को राज्य सरकार द्वारा जून 2020 और जनवरी 2022 में जारी सहायक शिक्षकों की चयन सूचियों को रद्द करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगा दी है।
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश सरकार को राज्य में 69,000 सहायक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए नई चयन सूची तैयार करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर उच्चतम न्यायालय द्वारा रोक लगाए जाने के बाद बसपा सुप्रीमो की प्रतिक्रिया सामने आई है। बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने कहा कि राज्य सरकार को इस मामले में ईमानदार रुख अपनाना चाहिए ताकि उम्मीदवारों के साथ कोई अन्याय न हो।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, “यूपी शिक्षक भर्ती मामले में आरक्षित वर्ग के अभ्यार्थियों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्हें अपना संवैधानिक हक जरूर मिलना चाहिए। साथ ही, सरकार इस मामले में अपना ईमानदार रूख़ अपनाए, ताकि इनके साथ कोई भी नाइन्साफी न हो।”
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को राज्य सरकार द्वारा जून 2020 और जनवरी 2022 में जारी सहायक शिक्षकों की चयन सूचियों को रद्द करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले पर भी रोक लगा दी। प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने रवि कुमार सक्सेना और 51 अन्य द्वारा दायर याचिका पर राज्य सरकार और उप्र बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सहित अन्य को नोटिस भी जारी किया है।
उच्च न्यायालय ने अगस्त में राज्य सरकार को राज्य में 69,000 सहायक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए नई चयन सूची तैयार करने का निर्देश दिया था। उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने पिछले साल 13 मार्च के एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देने वाली महेंद्र पाल और अन्य द्वारा दायर 90 विशेष अपीलों का निपटारा करते हुए यह आदेश जारी किया था।
बसपा सुप्रीमों ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “केन्द्र में काफी लम्बे समय तक सत्ता में रहते हुए कांग्रेस पार्टी की सरकार ने ओबीसी आरक्षण को लागू नहीं किया और न ही देश में जातीय जनगणना कराने वाली यह पार्टी अब इसकी आड़ में सत्ता में आने के सपने देख रही है। इनके इस नाटक से सचेत रहें जो आगे कभी भी जातीय जनगणना नहीं करा पाएगी।”
बहुजन समाजवादी पार्टी की प्रमुख मायावती ने आगे कहा कि, “जब तक देश में जातिवाद जड़ से खत्म नहीं हो जाता है तब तक भारत की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर होने के बावजूद भी इन वर्गों की सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक हालत बेहतर होने वाली नहीं है। अतः जातिवाद के समूल नष्ट होने तक आरक्षण की सही संवैधानिक व्यवस्था जारी रहना जरूरी।”
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