NEET 2026: नीट पुनर्परीक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम, स्वास्थ्य, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने दिया आश्वासन

Press Trust of India | June 11, 2026 | 08:21 AM IST | 1 min read

नीट पुनर्परीक्षा कराने के मामले पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मामलों की संसदीय समिति ने दोनों मंत्रालयों के सचिवों को तलब किया था।

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अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि नीट पुनर्परीक्षा सुरक्षित, पारदर्शी और त्रुटिरहित होगी। (प्रतीकात्मक-विकिमीडिया कॉमन्स)

नई दिल्ली: स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को एक संसदीय समिति को भरोसा दिलाया कि 21 जून को नीट पुनर्परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। नीट यूजी अंडरग्रेजुएट मेडिकल प्रवेश परीक्षा, जो मूल रूप से 3 मई को आयोजित की गई थी, प्रश्न पत्र लीक होने के आरोपों के बाद 12 मई को रद्द कर दी गई थी।

इसके बाद, नीट पुनर्परीक्षा कराने के मामले पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मामलों की संसदीय समिति ने दोनों मंत्रालयों के सचिवों को तलब किया था। समिति ने एनटीए और एनएमसी के शीर्ष अधिकारियों को भी तलब किया था।

संसदीय समिति के सदस्यों ने अधिकारियों से प्रवेश परीक्षाओं को निष्पक्ष, पारदर्शी और गड़बड़ी-मुक्त बनाने के लिए पूरी तरह भरोसेमंद एवं त्रुटिरहित व्यवस्था अपनाने को कहा।

NEET Retest 2026: संसदीय समिति ने दी सलाह

समिति के सदस्यों ने अधिकारियों से कहा कि चीन, अमेरिका और अन्य देशों में भी इसी प्रकार की प्रवेश परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं, लेकिन वहां प्रश्नपत्र लीक होने या अन्य अनियमितताओं की घटनाएं सामने नहीं आतीं।

सदस्यों ने अधिकारियों को दूसरे देशों के सर्वोत्तम तौर तरीकों और प्रक्रियाओं से सीख लेने तथा उन्हें अपनाने की सलाह दी, ताकि देश की परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाया जा सके।

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NEET UG 2026 Exam: मंत्रालय के अधिकारियों ने दिया आश्वासन

समिति ने एनएमसी और एनटीए के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही, सदस्यों ने छात्रों की आत्महत्या, पेपर लीक और परीक्षाएं रद्द होने की वजह से उम्मीदवारों में बढ़ती चिंता का भी जिक्र किया।

अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि नीट पुनर्परीक्षा सुरक्षित, पारदर्शी और त्रुटिरहित होगी। प्रश्नपत्र विवाद के बाद यह तीसरी संसदीय समिति थी, जिसके सामने स्वास्थ्य और एमओई, एनटीए व एनएमसी के अधिकारियों ने अपना पक्ष रखा।

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