Press Trust of India | July 26, 2026 | 10:51 AM IST | 3 mins read
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद नए शिक्षा मंत्री से प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा सरकारी स्कूलों एवं प्राथमिक शिक्षा को मजबूत बनाने की मांग की।

नई दिल्ली: नीट पेपर लीक को लेकर करीब एक महीने तक जंतर-मंतर पर डटे रहने वाले छात्रों का कहना है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से उनकी एक बड़ी मांग पूरी हुई है और वह उम्मीद कर रहे हैं कि नए शिक्षा मंत्री व्यवस्था में कुछ ठोस बदलाव करेंगे। प्रधान के इस्तीफे के बाद अपनी मांग पूरी होने का जश्न मना रहे छात्रों से जब ‘पीटीआई-भाषा’ ने सवाल किया कि नए शिक्षा मंत्री से उनकी क्या उम्मीदें है तो अलग-अलग राज्यों से आए प्रदर्शनकारियों की बातों में तीन मांगें बार-बार सामने आईं और वह थीं- परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा सरकारी स्कूलों एवं प्राथमिक शिक्षा को मजबूत बनाना।
पिछले करीब एक महीने यानी आंदोलन की शुरुआत से ही धरने में शामिल गाजियाबाद के राज यादव ने कहा कि सरकार को सबसे पहले शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव करना चाहिए। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “मैं नए शिक्षा मंत्री से यह मांग करता हूं कि वह शिक्षा प्रणाली पर ध्यान दें। पूरी शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाएं और शिक्षा व्यवस्था की खामियों को दूर कर इसे सही तरीके से संचालित करें।” धरना स्थल पर मौजूद छात्रों की अलग-अलग आवाजों में भले ही शब्द अलग थे, लेकिन उनकी अपेक्षाएं लगभग एक जैसी रहीं।
उनका कहना है कि शिक्षा मंत्री का बदलना केवल शुरुआत है। असली बदलाव तब माना जाएगा, जब शिक्षा व्यवस्था पारदर्शी होगी, सरकारी स्कूल में बेहतर शिक्षा दी जाएगी, योग्य शिक्षक उपलब्ध होंगे और मेहनत करने वाले छात्रों को पेपर लीक तथा महंगी शिक्षा जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। दिल्ली के लक्ष्मी नगर की रहने वाली सृष्टि का कहना है कि महंगी शिक्षा ने पढ़ाई को कई छात्रों के लिए संघर्ष बना दिया है। उन्होंने बताया कि अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्हें खुद काम करना पड़ता है और ऐसे में अगर पेपर लीक हो जाए तो केवल परीक्षा ही नहीं, बल्कि मेहनत, समय और पैसे-तीनों पर पानी फिर जाता है।
सृष्टि ने नए शिक्षा मंत्री से मांग की कि सभी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नियुक्त किए जाएं, शिक्षा को अधिक किफायती बनाया जाए और सरकारी स्कूलों में बच्चों के कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएं। करीब 15 से 20 दिनों से प्रदर्शन में शामिल राजस्थान के विक्रम चौधरी का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की शुरुआत प्राथमिक विद्यालयों से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर बनाने, शिक्षा का बजट बढ़ाने और यूपीएससी, नीट, जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सरकारी स्तर पर बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराने की जरूरत है।
उनके अनुसार, “इस देश में शिक्षा बहुत महंगी हो गई है। सरकार को इस पर गंभीरता से काम करना चाहिए।” नीट की तैयारी कर रहे 11वीं कक्षा के छात्र शौर्य ने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से उनकी उम्मीद जगी है। उन्होंने कहा, “मैं बहुत खुश हूं कि हमारी आवाज सुनी गई। मुझे पूरी उम्मीद है कि अब नए शिक्षा मंत्री पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं होने देंगे।”
प्रदर्शन में 20 जुलाई से शामिल उत्तर प्रदेश के बागपत निवासी गौरव तोमर ने प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने, सरकारी स्कूलों में कौशल विकास को बढ़ावा देने और महंगी शिक्षा पर प्रभावी नियंत्रण की मांग की। उन्होंने कहा, “शिक्षा व्यवसाय नहीं, बल्कि हर बच्चे का अधिकार हैं जो उसे मिलनी ही चाहिए।” राजस्थान के जैसलमेर निवासी श्रवण कुमार ने कहा कि छात्रों को बार-बार पुनर्परीक्षा की स्थिति का सामना नहीं करना पड़े और दूर-दराज में परीक्षा केंद्र आवंटित करने जैसी समस्याओं का समाधान किया जाए। उन्होंने शिक्षा का बजट बढ़ाने, शिक्षा को अधिक सुलभ और किफायती बनाने तथा सरकारी स्कूलों में योग्य शिक्षकों की भर्ती पर जोर दिया।