NCERT Clarification: कक्षा 9वीं की किताब से संविधान की प्रस्तावना हटाने की खबरें भ्रामक, NCERT ने किया स्पष्ट
Saurabh Pandey | June 27, 2026 | 06:43 PM IST | 2 mins read
NCERT ने कक्षा 9वीं की सामाजिक विज्ञान की किताब से 'प्रस्तावना' हटाने के दावों को भ्रामक बताते हुए खारिज किया है। परिषद के अनुसार, नए शैक्षिक ढांचे (NEP 2020) के तहत पाठ्यक्रम का पुनर्गठन किया गया है और प्रस्तावना पर विस्तृत चर्चा को अब कक्षा 10वीं के सिलेबस में शामिल किया गया है।
नई दिल्ली : राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने साफ किया है कि कक्षा 9वीं की संशोधित सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक से संविधान की 'प्रस्तावना' को हटाया नहीं गया है। परिषद ने ऐसी सभी खबरों को 'भ्रामक' बताते हुए खारिज कर दिया है। NCERT का कहना है कि ये बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) के तहत पाठ्यक्रम को नए सिरे से तैयार करने का हिस्सा हैं।
एनसीईआरटी के अनुसार, संवैधानिक विषयों को किसी एक ही पाठ्यपुस्तक में सीमित रखने के बजाय अलग-अलग कक्षाओं में पुनर्वितरित किया गया है। हालांकि कक्षा 9वीं की संशोधित किताब में अब प्रस्तावना पर कोई अलग अध्याय नहीं है, लेकिन यह अभी भी NCERT की सभी पाठ्यपुस्तकों के शुरुआती पन्नों पर प्रमुखता से छपी हुई है। इसके अलावा, प्रस्तावना पर विस्तृत चर्चा को अब कक्षा 10वीं के पाठ्यक्रम में शामिल कर दिया गया है।
परिषद ने यह भी बताया कि न्याय, स्वतंत्रता, समानता, धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद जैसे मुख्य संवैधानिक मूल्यों को कक्षा 6 से 8 के पाठ्यक्रम में ही शामिल किया जा चुका है, और उच्च कक्षाओं में इन पर अधिक विस्तार से चर्चा की जाएगी। NCERT का तर्क है कि संशोधित किताबों की पुरानी किताबों से अध्याय-दर-अध्याय तुलना करना सही नहीं है, क्योंकि नई पाठ्यपुस्तकें सामाजिक विज्ञान पढ़ाने के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण का पालन करती हैं।
एनसीईआरटी के सूत्रों ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया
एनसीईआरटी के सूत्रों ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि ऐसी खबरें गुमराह करने वाली हैं, जिनमें कहा गया है कि कक्षा 9 की नई सोशल साइंस की किताब से प्रस्तावना को हटा दिया गया है। नए नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क के तहत सिलेबस को फिर से डिज़ाइन किया गया है, इसलिए टॉपिक्स को एक ही किताब में शामिल करने के बजाय अलग-अलग क्लास में बांटा गया है।
एनसीईआरटी के सूत्रों के मुताबिक, सभी नई NCERT किताबों (सोशल साइंस की सभी किताबों सहित) के शुरुआती पन्नों में प्रस्तावना अभी भी दी गई है। यह कक्षा 10 के सिलेबस का भी हिस्सा है। उनका यह भी कहना है कि धर्मनिरपेक्षता, न्याय, आज़ादी और समाजवाद जैसे संवैधानिक मूल्यों को क्लास 6 से 8 में (खासकर क्लास 7 की सोशल साइंस की किताब में) पहले ही शामिल किया जा चुका है और क्लास 10 में इनके बारे में और विस्तार से बताया जाएगा।
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यह स्पष्टीकरण उन खबरों के बाद आया है जिनमें दावा किया गया था कि कक्षा 9वीं की नई किताब से 'प्रस्तावना' को हटा दिया गया है, जबकि वर्ष 1975-77 के 'आपातकाल' पर एक नया खंड शामिल किया गया है। इन खबरों को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार और परिषद की तीखी आलोचना की थी। इसके जवाब में NCERT ने दोहराया कि पाठ्यक्रम के इस पुनर्गठन का उद्देश्य दोहराव को कम करना और नए शैक्षिक ढांचे के तहत अवधारणात्मक समझ (Conceptual Learning) को बेहतर बनाना है।
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