आईआईटी रुड़की के बायोसाइंसेज व बायोइंजीनियरिंग विभाग में ‘अशोक सूता मॉलिक्यूलर मेडिसिन फैसिलिटी’ का उद्घाटन
Santosh Kumar | March 16, 2026 | 06:18 PM IST | 2 mins read
इस अवसर पर आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के के पंत, संकाय सदस्य, शोधकर्ता तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
उत्तराखंड: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) ने बायोसाइंसेज और बायोइंजीनियरिंग (बीएसबीई) विभाग के अंतर्गत ‘अशोक सूता मॉलिक्यूलर मेडिसिन फैसिलिटी’ का उद्घाटन किया। यह पहल राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं और वैश्विक वैज्ञानिक प्रगति के अनुरूप, उन्नत बायोमेडिकल अनुसंधान बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस सुविधा का उद्घाटन आईआईटी रुड़की के पूर्व छात्र, अशोक सूता ने किया। इस अवसर पर आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के के पंत, संकाय सदस्य, शोधकर्ता तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
अशोक सूता मॉलिक्यूलर मेडिसिन फैसिलिटी को दवा की खोज, बायोमॉलिक्यूलर अनुसंधान और अगली पीढ़ी के डायग्नोस्टिक उपकरणों के विकास में सहायता प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है।
यह सुविधा शोधकर्ताओं को बीमारी के तंत्र को समझने और बायोमॉलिक्यूलर लक्ष्यों की पहचान करने से लेकर, संभावित अणुओं के प्रायोगिक सत्यापन और परीक्षण पद्धतियों के विकास तक, विभिन्न प्रकार के कार्य करने में सक्षम बनाती है।
निदेशक ने उपस्थित लोगों को किया संबोधित
यह सुविधा प्रोटीन विज्ञान, आणविक और कोशिकीय, संरचनात्मक जीव विज्ञान और जैव-भौतिकी जैसे क्षेत्रों को एकीकृत करके कैंसर, तंत्रिका संबंधी विकारों, चयापचय संबंधी स्थितियों और संक्रामक रोगों पर उच्च-स्तरीय अनुसंधान को बढ़ावा देगी।
यह प्रोटीन शुद्धिकरण प्रणालियों, HPLC/UPLC, GC-MS, फ्लो साइटोमीटर्स, कॉन्फोकल माइक्रोस्कोप्स और अन्य उन्नत उपकरणों से सुसज्जित है। कार्यक्रम के दौरान, आईआईटी रुड़की के निदेशक केके पंत ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया।
उन्होंने कहा, “ यह उन्नत अवसंरचना और अंतःविषयी विशेषज्ञता का यह समन्वय अनुवादात्मक अनुसंधान को गति देगा और स्वास्थ्य नवाचार, प्रिसीजन मेडिसिन तथा वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता से जुड़े राष्ट्रीय लक्ष्यों में सार्थक योगदान देगा।”
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आईआईटी रुड़की के पूर्व छात्र अशोक सूता ने कहा, “इस सुविधा की स्थापना इस बात को रेखांकित करती है कि वैज्ञानिक खोजों को समाजोपयोगी परिणामों में बदलने के लिए मजबूत अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कितना आवश्यक है।"
उन्होंने आगे कहा कि मुझे गर्व है कि आईआईटी रुड़की मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स, प्रिसीजन मेडिसिन और औषधि खोज के क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को सुदृढ़ कर रहा है, जिससे राष्ट्रीय और वैश्विक स्वास्थ्य समाधान विकसित करने में योगदान मिलेगा।”
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