CBSE Three-Language Policy: सीबीएसई ने कक्षा 9 के छात्रों के लिए 1 जुलाई से 3 भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया

Press Trust of India | May 16, 2026 | 09:06 PM IST | 2 mins read

सीबीएसई ने कहा कि छात्रों पर अनावश्यक दबाव कम करने और सीखने पर ध्यान केंद्रित रखने के लिए कक्षा 10 में आर3 के लिए कोई बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी।

बोर्ड ने विद्यालयों से 30 जून तक ओएएसआईएस पोर्टल पर कक्षा 6 से 9 तक के आर3 भाषा पाठ्यक्रमों को अद्यतन करने को भी कहा है। (इमेज-एक्स/@cbseindia29)

नई दिल्ली: सीबीएसई ने एक जुलाई से कक्षा 9 के छात्रों के लिए कम से कम दो मूल भारतीय भाषाओं सहित 3 भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य कर दिया है। यह कदम सीबीएसई द्वारा अपनी अध्ययन योजना को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या प्रारूप (एनसीएफ-एसई)-2023 के अनुरूप करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। परिपत्र के अनुसार विदेशी भाषा का चयन करने वाले छात्र दो भारतीय मूल भाषाओं का अध्ययन करने के बाद ही इसका तीसरी भाषा के रूप में या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में चयन कर सकते हैं।

सीबीएसई द्वारा जारी किए गए परिपत्र में कहा गया है, ''एक जुलाई, 2026 से कक्षा नौ के लिए तीन भाषाओं (आर1, आर2, आर3) का अध्ययन अनिवार्य होगा, जिनमें कम से कम दो मूल भारतीय भाषाएं होनी चाहिए।''

बोर्ड ने कहा कि छात्रों पर दबाव कम करने और सीखने पर ध्यान केंद्रित रखने के लिए कक्षा 10 में आर3 के लिए कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसमें कहा गया है, 'आर3 के सभी मूल्यांकन पूरी तरह से विद्यालय-आधारित और आंतरिक होंगे।

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आर3 में छात्रों का प्रदर्शन सीबीएसई प्रमाणपत्र में विधिवत रूप से दर्शाया जाएगा। आर3 के कारण किसी भी छात्र को कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा। नमूना प्रश्न पत्र और मानदंड बोर्ड द्वारा शीघ्र ही साझा किए जाएंगे।

बोर्ड ने विद्यालयों से 30 जून तक ओएएसआईएस पोर्टल पर कक्षा 6 से 9 तक के आर3 भाषा पाठ्यक्रमों को अद्यतन करने को भी कहा है। परिपत्र में कहा गया है कि मूल भारतीय भाषा के योग्य शिक्षकों की कमी का सामना कर रहे विद्यालय अंतरिम उपाय अपना सकते हैं, जैसे कि अंतर-विद्यालय संसाधन साझाकरण, वर्चुअल या मिश्रित शिक्षण सहायता, सेवानिवृत्त भाषा शिक्षकों और योग्य स्नातकोत्तर शिक्षकों की नियुक्ति।

विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएनएसएन) को छूट प्रदान की जाएगी, जबकि भारत लौटने वाले विदेशी छात्रों को दो मूल भारतीय भाषाओं के अध्ययन की आवश्यकता से मामले-दर-मामले के आधार पर छूट मिल सकती है।

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