बीएचयू ने यूजी-पीजी स्तर पर टीचिंग लैबोरेटरी के आधुनिकीकरण व विकास के लिए नई पहल की घोषणा की

Santosh Kumar | August 2, 2026 | 10:18 AM IST | 2 mins read

यूनिवर्सिटी ने नई टीचिंग लैबोरेटरी बनाने के साथ-साथ मौजूदा लैबोरेटरी के विस्तार, विविधीकरण और विकास के लिए प्रस्ताव मंगाए हैं।

बीएचयू की इस पहल से विभिन्न विषयों में प्रयोगशाला आधारित पढ़ाई को बढ़ावा मिलेगा। (प्रतीकात्मक-विकिमीडिया कॉमन्स)

वाराणसी: अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट लेवल पर टीचिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने और छात्रों की रिसर्च क्षमताओं को बढ़ावा देने के मकसद से, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी ने टीचिंग लैबोरेटरी के आधुनिकीकरण और विकास के लिए फैकल्टी सदस्यों को आर्थिक मदद देने की एक नई योजना शुरू की है। यूनिवर्सिटी ने नई टीचिंग लैबोरेटरी बनाने के साथ-साथ मौजूदा लैबोरेटरी के विस्तार, विविधीकरण और विकास के लिए प्रस्ताव मंगाए हैं।

इस योजना के तहत, ₹25 लाख या उससे अधिक लागत वाले प्रस्तावों पर आर्थिक मदद के लिए विचार किया जाएगा। इसका मकसद लैब-आधारित लर्निंग को मजबूत करना और छात्रों में रिसर्च और इनोवेशन की क्षमता को बढ़ावा देना है।

ये प्रस्ताव छात्रों की क्षमताओं को बढ़ाने, प्रयोग पर आधारित नए मॉड्यूल शामिल करने, प्रयोगशाला का बुनियादी ढांचा विकसित करने और कोर्स के अनुरूप आधुनिक प्रयोगों के साथ पुराने मॉड्यूल को बदलने जैसे पहलुओं पर केंद्रित होंगे।

12 सदस्यों की विशेषज्ञ समिति बनाई गई

इन प्रस्तावों से एकेडमिक्स और अनुभव-आधारित सीखने की गुणवत्ता बेहतर होगी। छात्रों को रिसर्च और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के अधिक मौके मिलेंगे, साथ ही इंटरडिसिप्लिनरी शिक्षा और उनके प्रोफेशनल डेवलपमेंट को भी बढ़ावा मिलेगा।

प्रस्तावों का मूल्यांकन करने और उन्हें शॉर्टलिस्ट करने के लिए, इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के सेंटर फ़ॉर जेनेटिक डिसऑर्डर के प्रोफ़ेसर परिमल दास की अध्यक्षता में 12 सदस्यों की एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई है।

शुरुआती दौर में शॉर्टलिस्ट किए गए आवेदकों को समिति के सामने अपने प्रस्ताव पेश करने के लिए बुलाया जाएगा। यूनिवर्सिटी के सभी फैकल्टी सदस्य इन प्रस्तुतियों में शामिल हो सकेंगे।

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प्रस्ताव प्रस्तुत करने की लास्ट डेट 14 अगस्त

प्रस्ताव प्रस्तुत करने की लास्ट डेट 14 अगस्त है। प्रारंभिक चयन की प्रक्रिया 21 अगस्त तक पूरी होगी, जबकि चयनित प्रस्तावों की प्रस्तुतियां 29 अगस्त से 3 सितंबर के बीच होंगी। समिति की संस्तुतियां कुलपति को प्रस्तुत की जाएँगी।

इस पहल से विभिन्न विषयों में प्रयोगशाला आधारित पढ़ाई को बढ़ावा मिलेगा। यूजी-पीजी स्तर पर आधुनिक लैब सुविधाएं विकसित होंगी, अनुभव आधारित शिक्षा मजबूत होगी और छात्रों की शोध व नवाचार गतिविधियों में भागीदारी बढ़ेगी।

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