Uttarakhand Paper Leak: देवभूमि को भाजपा सरकार ने पेपर लीक का ‘एपिसेंटर’ बना दिया है - राहुल गांधी

Abhay Pratap Singh | July 16, 2026 | 12:56 PM IST | 2 mins read

राहुल गांधी ने कहा कि यह सिर्फ पेपर ‘लीक’ नहीं, बल्कि प्रदेश के युवाओं के अधिकार, रोजगार और भविष्य की चोरी है।

कांग्रेस नेता ने शिक्षा क्रांति की दिशा में छात्रों और युवाओं का उत्साह बढ़ाने के लिए ‘छात्रों की गूंज’ एंथम जारी किया। (इमेज-आधिकारिक एक्स/राहुल गांधी)

नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने उत्तराखंड में पेपर लीक को लेकर 16 जुलाई को एक बार फिर प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि, देवभूमि को पेपर लीक का मुख्य केंद्र (Epicentre) बना दिया गया है। हम छात्रों का भविष्य नीलाम नहीं होने देंगे।

राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, “17 जुलाई को देहरादून आ रहा हूं। पर उत्तराखंड ही क्यों? क्योंकि देवभूमि को पेपर लीक का ‘एपिसेंटर’ बना दिया गया है। UKSSSC परीक्षा में यहां एक “सिस्टम” बैठ गया है, जहां पटवारी, लेखपाल या कोई और पद काबिलियत से नहीं, अपराधियों के तय किए रेट से मिलता है।”

उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा, सरकार ने सख्त नकल-विरोधी कानून बनाया है, फिर भी लीक होते रहे। कानून कागज पर रहा और पेपर बाजार में बिकते रहे। आग कहा, जरा सोचिए, एक बच्चे ने सालों तैयारी की। फॉर्म भरा, फीस दी, दूर सेंटर तक गया और उसका पद किसी और ने खरीद लिया।

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राहुल गांधी ने आगे कहा कि, यह सिर्फ पेपर ‘लीक’ नहीं, बल्कि प्रदेश के युवाओं के अधिकार, रोजगार और भविष्य की चोरी है। उन्होंने कहा, “मैं उत्तराखंड के हर अभ्यर्थी, हर छात्र, हर युवा से कहता हूं यह आपकी लड़ाई है और मैं आपके साथ हूं।” राहुल ने 17 जुलाई को अपने कार्यक्रम में छात्रों से शामिल होने की अपील की।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर किए गए में कहा कि, “17 जुलाई, 2026 ka देहरादून आइए। ‘छात्रों की गूंज’ को हुंकार बनाएं। हम युवाओं के भविष्य को नीलाम और उनके सपनों को लीक नहीं होने देंगे।” उन्होंने शिक्षा क्रांति की दिशा में छात्रों और युवाओं का उत्साह बढ़ाने के लिए #ChhatronKiGoonj एंथम जारी किया।

एक अन्य पोस्ट में लिखा, भारत की शिक्षा व्यवस्था अब एक बेईमान वसूली तंत्र बन चुकी है। जो व्यवस्था बच्चों के भविष्य को तैयार करने के लिए बनी थी, वो आज उन्हें और उनके परिवार को कर्ज, तनाव और निराशा में धकेल रही है। मोदी सरकार और शिक्षा मंत्री यह सब देख रहे हैं। उन्होंने चुप्पी चुनी और जवाबदेही से मुंह मोड़ लिया है।

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