नीट और सीयूईटी परीक्षा साल में 2 बार कराने की सिफारिश, शिक्षा मंत्रालय की कमेटी ने सौंपा ड्राफ्ट

Saurabh Pandey | September 29, 2026 | 01:32 PM IST | 2 mins read

शिक्षा मंत्रालय की समिति ने नीट और सीयूईटी को वर्ष में दो बार कराने का दिया प्रस्ताव दिया है। इससे प्रवेश परीक्षाओं में छात्रों का तनाव घटेगा।

जेईई मेन की तर्ज पर साल में 2 बार नीट और सीयूईटी परीक्षा का आयोजित किए जाने का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)

नई दिल्ली : देश में जेईई, नीट और सीयूईटी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय समिति ने प्रवेश परीक्षाओं के ढांचे में बड़े बदलावों का एक ड्राफ्ट तैयार किया है। इस ड्राफ्ट में नीट (यूजी) और सीयूईटी जैसी परीक्षाओं को जेईई मेन की तरह साल में कम से कम दो बार आयोजित करने की सिफारिश की गई है।

यदि यह ड्राफ्ट फाइनल हो जाता है तो छात्रों को परीक्षाओं के तनाव से मुक्ति मिलेगी। अभी साल में एक परीक्षा होने से छात्रों पर बहुत दबाव रहता है, जबकि साल में दो बार परीक्षा होने से यह डर खत्म होगा और छात्रों को एक और मौका मिलेगा। इस पहल का उद्देश्य छात्रों की प्राइवेट कोचिंग सेंटर्स पर निर्भरता कम करना और स्कूल लेवल पर तैयारी मजबूत करना है। हालांकि यह प्रस्ताव अभी ड्राफ्ट स्टेज में है और कोई भी बदलाव लागू होने से पहले इसे सरकार की फाइनल मंजूरी से गुजरना होगा।

शिक्षा मंत्रालय ने जून 2025 में तत्कालीन उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय समिति का गठन किया था, ताकि कोचिंग संस्थानों पर छात्रों की निर्भरता कम करने के तरीकों की जांच की जा सके। हालांकि विनीत जोशी अब इस पद पर नहीं हैं, लेकिन उनके पद छोड़ने से पहले समिति द्वारा तैयार ड्राफ्ट को अंतिम सुझावों के लिए विशेषज्ञों के साथ साझा किया गया था।

ड्राफ्ट के मुख्य बिंदु

  1. छात्रों पर घटेगा दबाव - वर्तमान में नीट और सीयूईटी जैसी परीक्षाएं साल में केवल एक बार होती हैं, जिससे छात्रों पर अत्यधिक मानसिक दबाव रहता है। साल में दो अवसर मिलने से अभ्यर्थियों को अपनी तैयारी में सुधार कर दूसरा मौका मिल सकेगा।
  2. महंगी कोचिंग पर निर्भरता कम करना - ड्राफ्ट का मुख्य उद्देश्य छात्रों की महंगी प्राइवेट कोचिंग पर निर्भरता को खत्म करना और स्कूली शिक्षा व प्रतियोगी परीक्षाओं के बीच के अंतर को कम करना है।
  3. स्कूली शिक्षकों को विशेष ट्रेनिंग - मसौदे में स्कूली शिक्षकों को प्रतियोगी परीक्षाओं की जरूरतों के अनुसार छात्रों को पढ़ाने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित करने का सुझाव दिया गया है।
  4. प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर की समीक्षा - समिति ने परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों को केवल एनसीईआरटी (NCERT) तक सीमित रखने के बजाय विभिन्न राज्य बोर्डों (State Boards) के सिलेबस को ध्यान में रखते हुए संतुलित बनाने की सिफारिश की है।

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शिक्षा मंत्रालय की अंतिम मंजूरी जरूरी

यह प्रस्ताव फिलहाल समिति द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट के रूप में है। शिक्षा मंत्रालय की अंतिम मंजूरी और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बाद ही इसे आधिकारिक रूप से लागू किया जाएगा।

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