आईआईटी गुवाहाटी ने भूकंप रोधी कंक्रीट की दीवार बनाने के लिए एकीकृत ‘3डी प्रिंटिंग’ तकनीक विकसित की

Press Trust of India | April 5, 2026 | 05:51 PM IST | 2 mins read

दुनिया भर में ‘3डी प्रिंटर’ मशीन से तैयार इमारतों के निर्माण में कुछ महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, लेकिन भूकंप संभावित क्षेत्रों में इनका व्यापक उपयोग अभी तक नहीं हो पाया है।

यह शोध ‘जर्नल ऑफ बिल्डिंग इंजीनियरिंग’ में प्रकाशित हुआ है। (इमेज-आधिकारिक वेबसाइट)

नई दिल्ली: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गुवाहाटी के अनुसंधानकर्ताओं ने ‘3डी-प्रिंटर’ मशीन के जरिये भूकंप रोधी कंक्रीट की दीवार बनाने की तकनीक विकसित की है। श्रम और सामग्री की आवश्यकता को समाप्त करके अधिक जटिल आकृतियों वाली संरचनाएं बनाने में सक्षम करने वाली ‘3डी प्रिंटिंग’ को निर्माण कार्य में विश्व स्तर पर अपनाया जा रहा है। हालांकि, दुनिया भर में ‘3डी प्रिंटर’ मशीन से तैयार इमारतों के निर्माण में कुछ महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, लेकिन भूकंप संभावित क्षेत्रों में इनका व्यापक उपयोग अभी तक नहीं हो पाया है।

यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर बिरंची पांडा के अनुसार, इसका एक कारण यह है कि पूरी तरह ‘3डी प्रिंटर’ के जरिये बनाई गई कंक्रीट की दीवारों के भूकंप के कई झटकों के दौरान प्रदर्शन के बारे में सीमित ज्ञान और समझ है।

पांडा ने पीटीआई-भाषा से कहा, “वर्तमान में ‘3डी प्रिंटर’ के जरिये दीवारों के बीच स्टील डालने के लिए कोई मानक प्रक्रिया नहीं है जो मौजूदा भवन संहिता के अनुरूप हो। इस कमी को दूर करने के लिए हमने भूकंपीय बल की दशा में 3डी प्रिंटर से तैयार सामग्री से बनी तीन पूर्ण आकार की दीवारों का निर्माण करके उसका परीक्षण किया।” यह शोध ‘जर्नल ऑफ बिल्डिंग इंजीनियरिंग’ में प्रकाशित हुआ है।

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पहली दीवार साधारण कंक्रीट (3डीपीएम) से बनी थी, वहीं दूसरी दीवार ‘स्ट्रेन-हार्डनिंग डक्टाइल कंक्रीट’ (3डीपीसी-सीएफ) से बनी थी, जो एक विशेष प्रकार का कंक्रीट है जो बिना टूटे मुड़ सकता है, लेकिन उसमें छोटी दरारें पड़ सकती हैं। यह विशेष कंक्रीट क्षति शुरू होने के बाद भी दीवार का भार सहन करने में सक्षम था। तीसरी दीवार मॉड्यूलर रूप से प्रबलित लचकदार कंक्रीट (3डीपीसी-सीएफआर) से बनी थी, जो उसी विशेष कंक्रीट का एक अतिरिक्त गुण है जिसमें दीवार की संरचना में एकीकृत मॉड्यूलर स्टील सुदृढीकरण ढांचा शामिल किया जाता है।

ांडा ने कहा, “हमने इस सुदृढ़ीकरण को इस प्रकार एकीकृत किया कि दीवार बनाने की प्रक्रिया में बाधा डाले बिना इसे '3डी प्रिंटर' का उपयोग करके बनाया जा सकता है। यह दीवार भारतीय और अंतरराष्ट्रीय भूकंप सुरक्षा मानकों के अनुरूप सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करता है।”

3डीपीसी-सीएफ और 3डीपीसी-सीएफआर दीवारों की मजबूती और वास्तविक दुनिया में इनकी उपयोगिता का परीक्षण करने के लिए शोध दल ने बार-बार झटका या बल उत्पन्न करके 'कंप्यूटर सिमुलेशन' के समर्थन से उनके व्यवहार का बड़े पैमाने पर परीक्षण किया। परिणामों से पुष्टि हुई कि विशेष लचकदार कंक्रीट का उपयोग करके 3डी-प्रिंटर से बनी दीवारों में स्टील सुदृढीकरण को शामिल करने से उनकी भूकंप प्रतिरोधकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ जो इन्हें सुरक्षित और संरचनात्मक रूप से विश्वसनीय विनिर्माण प्रथाओं के विकास के लिए उपयुक्त बनाता है।

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