IIT Delhi: आईआईटी दिल्ली ने एमएससी छात्र की मौत की जांच के लिए बाहरी समिति की गठित; मेंटल हेल्थ पर दिया जोर

Abhay Pratap Singh | August 25, 2026 | 09:04 PM IST | 3 mins read

आईआईटी दिल्ली ने कहा कि वह संस्थान की आंतरिक प्रणालियों के माध्यम से हल न होने वाली शिकायतों के समाधान के लिए एक बाहरी लोकपाल नियुक्त करने की योजना बना रहा है।

ऋषिकेश कुमार ने जुलाई 2025 में आईआईटी दिल्ली में दाखिला लिया और कैंपस के हॉस्टल में रह रहे थे। (इमेज-आधिकारिक वेबसाइट)

नई दिल्ली: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (IIT Delhi) ने 31 वर्षीय एमएससी (MSc) फिजिक्स के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के कारणों की जांच के लिए पांच सदस्यीय बाहरी जांच समिति का गठन किया है। यह निर्णय कुमार की मौत की जांच की मांग को लेकर सैकड़ों छात्रों के विरोध प्रदर्शन के एक दिन बाद लिया गया।

आईआईटी दिल्ली के लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स की छठी मंजिल से गिरने के बाद छात्र की हुई मौत -

ऋषिकेश की मौत 22 अगस्त को आईआईटी दिल्ली के लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स की छठी मंजिल से कथित तौर पर गिरने के बाद हुई थी। पुलिस ने बताया है कि कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। मौत के कारणों की जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार, छात्र को कैंपस हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

जुलाई 2025 में लिया था दाखिला -

कुमार ने जुलाई 2025 में आईआईटी दिल्ली में दाखिला लिया था और परिसर स्थित छात्रावास में रह रहे थे। छात्र के असामयिक निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए 24 अगस्त 2026 को शोकसभा भी आयोजित की गई।

परिवार को आर्थिक मदद देने की पहल -

संस्थान ने संकाय सदस्यों, छात्रों और कर्मचारियों के योगदान के माध्यम से उनके परिवार को आर्थिक सहायता देने की भी पहल की है।

स्पेशलाइज्ड अस्पताल में एक माह चला इलाज -

संस्थान के अनुसार, इस वर्ष होली के कुछ दिन बाद साथी छात्रों द्वारा उनकी स्थिति को लेकर चिंता जताए जाने के बाद उन्हें संस्थान की एंबुलेंस से तत्काल आईआईटी दिल्ली अस्पताल ले जाया गया। वहां संस्थान के मनोचिकित्सक ने जांच की। इसके बाद, उन्हें स्पेशलाइज्ड अस्पताल में लगभग एक महीने तक भर्ती रखकर इलाज किया गया और फिर छुट्टी दे दी गई।


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नाम वापस लेने के अनुरोध को संस्थान ने दी थी मंजूरी-

छात्र ने दूसरे सेमेस्टर (जनवरी-मई 2026) से नाम वापस लेने का अनुरोध किया था, जिसे संस्थान ने मंजूर कर लिया। जुलाई और अगस्त 2026 में संस्थान के काउंसलर/डॉक्टर ने उन्हें काउंसलिंग और उपचार संबंधी सहायता प्रदान की तथा माता-पिता की निगरानी में रहने की सलाह दी। तीसरे सेमेस्टर (जुलाई-नवंबर 2026) से नाम वापस लेने के उनके अनुरोध को भी संस्थान ने मंजूरी दे दी।

पांच सदस्यीय बाहरी जांच समिति गठित -

संस्थान ने कहा कि इस तरह की हर दुखद घटना की गहन और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। आईआईटी दिल्ली ने इस घटना के कारणों की जांच के लिए एक 5 सदस्यीय बाहरी जांच समिति गठित की है। संस्थान ने समिति को मामले की व्यापक जांच करने और छात्र सहायता प्रणालियों को और मजबूत करने के लिए आवश्यक उपाय सुझाने का अधिकार दिया जाए।

लोकपाल नियुक्त की योजना -

इसके अलावा, मौजूदा आंतरिक व्यवस्थाओं से हल न हो पाने वाली छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए एक बाहरी लोकपाल (ombudsperson) नियुक्त करने की योजना बना रहा है।। संस्थान छात्रों को अपने सुझाव और चिंताएं सामने रखने की भी अपील की है, ताकि वह अपनी व्यवस्थाओं में लगातार सुधार कर सके।

आईआईटी दिल्ली अपने मेंटल हेल्थ सपोर्ट सिस्टम को कर रहा मजबूत -

आईआईटी दिल्ली ने बताया कि वह लगातार अपने मेंटल हेल्थ सपोर्ट सिस्टम को मजबूत कर रहा है और छात्रों को समय पर प्रोफेशनल एवं व्यापक देखभाल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। संस्थान में काउंसलरों की सुविधा उपलब्ध है। आईआईटी दिल्ली ने कहा कि छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

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