Santosh Kumar | August 25, 2026 | 12:41 PM IST | 2 mins read
विकास योजना में आईआईटी परिसर में 500 बिस्तर वाला सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल और प्रस्तावित 200 बिस्तर वाला कैंसर उपचार एवं अनुसंधान केंद्र भी शामिल है।

कानपुर: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के पूर्व छात्र एवं इंडिगो के सह-संस्थापक राकेश गंगवाल ने संस्थान में 'गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी' के विकास के लिए 300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त योगदान देने की प्रतिबद्धता जताई है। आईआईटी कानपुर की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, यह योगदान गंगवाल द्वारा 2022 में दिए गए 100 करोड़ रुपये के दान के बाद किया जा रहा है। उस योगदान से संस्थान में चिकित्सा विद्यालय स्थापित करने की योजना को गति मिली थी और नए योगदान के साथ स्कूल के लिए गंगवाल की कुल वित्तीय सहायता 400 करोड़ रुपये हो जाएगी।
इस पहल के तहत राकेश गंगवाल अन्य सहयोगियों, पूर्व छात्रों और शुभचिंतकों के योगदान के बराबर 300 करोड़ रुपये तक देंगे। यह राशि चिकित्सा शिक्षा, शोध और चिकित्सा तकनीक को बढ़ावा देने में उपयोग होगी।
गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी की विकास योजना में आईआईटी परिसर में 500 बिस्तर वाला सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल और प्रस्तावित 200 बिस्तर वाला कैंसर उपचार एवं अनुसंधान केंद्र भी शामिल है।
इन सुविधाओं से चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सकीय अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी। साथ ही, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों को मिलकर काम करने का अवसर मिलेगा।
आईआईटी कानपुर के निदेशक मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि इंजीनियरिंग, तकनीक और चिकित्सा में शोध की संभावनाओं को देखते हुए मेडिकल स्कूल की पहल की गई। 2022 में गंगवाल के 100 करोड़ रुपये के योगदान से योजना को गति मिली।
मणींद्र अग्रवाल ने आगे कहा कि ₹300 करोड़ का यह अतिरिक्त योगदान इस सपने को जल्द साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा। मेडिकल स्कूल के नवनियुक्त डीन अनिल के. लालवानी ने भी अपनी प्रतिक्रिया साझा की।
उन्होंने कहा, "समाज की सेवा के लिए मेडिकल, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को एक साथ लाने के स्कूल के विजन का दूरगामी असर होगा।" राकेश गंगवाल ने कहा, "पहले मेडिकल इंस्टिट्यूट का हिस्सा बनना मेरे लिए सम्मान और गर्व की बात है।"
इस मामले में दुर्ग जिले के एक निजी कॉलेज के एक प्रोफेसर और पांच छात्रों को गिरफ्तार किया गया था। अधिकारी ने बताया कि 20 अगस्त के प्रश्नपत्र लीक मामले में पुलिस की जांच के दौरान बीएससी कृषि प्रथम वर्ष के 'प्लांट पैथोलॉजी' विषय का प्रश्नपत्र भी लीक होने की बात सामने आई।
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