Sadhana Saptah 2026: उच्च शिक्षा विभाग ने ‘साधना सप्ताह 2026’ के तहत आईकेएस पर संवादपूर्ण सत्र आयोजित किया
Abhay Pratap Singh | April 10, 2026 | 11:56 AM IST | 2 mins read
इंडियन नॉलेज सिस्टम (IKS) को अपनाने वाले संस्थान अंतर्विषयी कार्यक्रमों विकसित कर सकते हैं, मौलिक अनुसंधान को प्रोत्साहित कर सकते हैं और ऐसी शिक्षण पद्धतियां विकसित कर सकते हैं, जो समग्र विकास पर केंद्रित हों।
नई दिल्ली: उच्च शिक्षा विभाग ने स्ट्रेंथनिंग एडैप्टिव डेवलपमेंट एंड ह्यूमेन एप्टिट्यूड फॉर नेशनल एडवांसमेंट (Saptah) सप्ताह 2026 के तहत भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) पर संवादपूर्ण सत्र का आयोजन किया। मिशन साधना सप्ताह 2026 कार्यक्रम 2 अप्रैल से 8 अप्रैल, 2026 तक आयोजित किया गया।
यह सत्र समकालीन शिक्षा, अनुसंधान और शासन में भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) की प्रासंगिकता पर केंद्रित था, जिसका उद्देश्य संरचित सहकर्मी अधिगम (पियर लर्निंग) और सार्थक संवाद को बढ़ावा देना था। इसमें यह भी रेखांकित किया गया कि भारत की समृद्ध बौद्धिक परंपराएं समस्या-समाधान, नवाचार और नीतिनिर्माण के आधुनिक दृष्टिकोणों को प्रभावी दिशा दे सकती हैं।
सत्र के दौरान प्रश्नोत्तर के माध्यम से प्रतिभागियों के साथ विस्तृत संवाद किया गया, जिसमें समेकित शिक्षा प्रणाली के निर्माण में आईकेएस की निरंतर प्रासंगिकता और सतत राष्ट्रीय प्रगति के लिए शासन प्रक्रियाओं में पारंपरिक ज्ञान के समावेश के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। इस अवसर पर शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।
Also read आईआईटी गुवाहाटी ने भूकंप रोधी कंक्रीट की दीवार बनाने के लिए एकीकृत ‘3डी प्रिंटिंग’ तकनीक विकसित की
उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव (प्रशासन) सैयद एकराम रिज़वी ने अपने संबोधन में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत क्षमता विकास आयोग की भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि यह नागरिक-केंद्रित सुशासन के लिए ज्ञान, कौशल और क्षमता बढ़ाने हेतु विभिन्न ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध कराता है।
आईआईटी हैदराबाद के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोहन राघवन ने कहा कि भले ही भारतीय ज्ञान प्रणाली की बाजार संभावनाएं व्यापक हैं, इसकी वास्तविक ताकत उच्च शिक्षा में इसकी परिवर्तनकारी भूमिका में निहित है। आईकेएस को एक अलग विषय के रूप में नहीं, बल्कि एक बहु-विषयी ढांचे के रूप में देखा जाना चाहिए, जो विज्ञान, अभियांत्रिकी, मानविकी और प्रबंधन जैसे शैक्षणिक क्षेत्रों को समृद्ध बना सकता है।
आगे कहा कि, उच्च शिक्षा में आईकेएस के एकीकरण के माध्यम से विश्वविद्यालय रटने पर आधारित सीखने की पद्धति से आगे बढ़कर ऐसे समग्र मॉडल की ओर अग्रसर हो सकते हैं, जो ज्ञान, उसके अनुप्रयोग और मूल्यों (धर्म) का संतुलित समन्वय करता है। यह दृष्टिकोण समकालीन शैक्षिक सुधारों के अनुरूप है, जो भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत पर आधारित अनुसंधान, नवाचार और समालोचनात्मक चिंतन को बढ़ावा देता है।
अगली खबर
]विशेष समाचार
]- JEE Main 2026 Cutoff for General Category: जेईई मेन 2026 के लिए सामान्य कैटेगरी की अपेक्षित कटऑफ जानें
- JEE Main 2026: एनआईटी पटना के लिए जेईई मेन में कितने मार्क्स चाहिए? जानें पात्रता, फीस, कटऑफ, औसत पैकेज
- JEE Main 2026: एनआईटी इलाहाबाद में प्रवेश के लिए जेईई मेन में कितने अंक चाहिए? पात्रता, फीस और कटऑफ जानें
- JEE Main 2026: एनआईटी दिल्ली के लिए जेईई मेन में कितने मार्क्स चाहिए? जानें पात्रता, फीस, कटऑफ, औसत पैकेज
- राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की तैयारी, ‘लाडू’, ‘रोटलो’ और ‘मोटो बापो’ जैसे स्थानीय शब्द होंगे शामिल
- राजस्थान में 7,000+ कम नामांकन वाले स्कूलों को मर्ज करने की तैयारी, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने जताया विरोध
- अगले 5 साल में 10 अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने की योजना, आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने दी जानकारी
- राज्यसभा में कांग्रेस सदस्य ने की हर स्कूल में छात्राओं के लिए अलग शौचालय सुनिश्चित करने की मांग
- हरियाणा के 23 जिलों में बनेंगे 90 आदर्श परीक्षा केंद्र, एचएसएससी अभ्यर्थियों को मिलेगी फ्री बस सुविधा
- Career Options After JEE: जेईई के बाद करियर के बेस्ट विकल्प क्या-क्या है? ट्रेंड्स जानें