Delhi School Fee Law: दिल्ली में स्कूल शुल्क संबंधी कानून के खिलाफ याचिका पर सुनवाई 2 फरवरी तक स्थगित
Press Trust of India | January 27, 2026 | 03:35 PM IST | 2 mins read
नए स्कूल फीस कानून में फीस की अनुमत कैटेगरी, अकाउंटिंग प्रक्रियाओं और अतिरिक्त शुल्कों पर प्रतिबंधों के बारे में विस्तृत प्रावधान हैं।
नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में विद्यालयों के शुल्क विनियमित करने वाले नए कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई 2 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी। दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने न्यायालय से कहा कि उच्च अधिकारियों के साथ एक बैठक हो चुकी है और मुद्दों के समाधान के लिए एक और बैठक जरूरी है जिसके बाद न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।
शीर्ष अदालत ने इस मामले को 2 फरवरी को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। इससे पहले, 19 जनवरी को न्यायालय ने दिल्ली के विद्यालयों में शुल्क को विनियमित करने वाले नए कानून को लागू करने के समय को लेकर दिल्ली सरकार से सवाल किया था।
उसने कहा था कि शैक्षणिक वर्ष पहले से ही जारी है, ऐसे में दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण एवं विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 का कार्यान्वयन भ्रामक और संभवत: अव्यावहारिक प्रतीत होता है।
Delhi School Fee Law: नए स्कूल शुल्क कानून को चुनौती
न्यायालय निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के संघों की उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें नए स्कूल शुल्क कानून और उसके नियमों को चुनौती दी गई है। यह कानून हाल ही में दिल्ली सरकार ने लागू किया है।
इसमें अनुमति प्राप्त शुल्क मदों, लेखांकन प्रक्रियाओं और अतिरिक्त शुल्कों पर प्रतिबंधों के संबंध में विस्तृत प्रावधान दिए गए हैं। साथ ही प्रति व्यक्ति शुल्क और कानून द्वारा अनुमोदित राशि से अधिक किसी भी प्रकार के शुल्क लेने पर रोक लगाई गई है।
उच्च न्यायालय ने 8 जनवरी को दिल्ली के निजी विद्यालयों को शुल्क विनियमन समितियों के गठन का निर्देश देने संबंधी अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था लेकिन ऐसी समितियों के गठन की समय सीमा 10 से बढ़ाकर 20 जनवरी कर दी थी।
उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि स्कूल प्रबंधन द्वारा समितियों को प्रस्तावित शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि को भी 25 जनवरी से बढ़ाकर 5 फरवरी कर दिया जाना चाहिए।
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