दिल्ली हाईकोर्ट ने फर्जी शिक्षण संस्थानों पर कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार को दिए निर्देश
Press Trust of India | May 20, 2026 | 09:37 PM IST | 2 mins read
अदालत फर्जी विश्वविद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई की मांग से जुड़ी वकील शशांक देव सुधि की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi HC) ने केंद्र सरकार को देश में तेजी से बढ़ रहे फर्जी उच्च शिक्षण संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई करने का बुधवार को निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि ऐसे फर्जी संस्थानों की ओर आकर्षित होने वाले छात्र आमतौर पर छोटे शहरों से आते हैं।
पीठ ने कहा कि वे अपना समय और संसाधन खर्च करते हैं, लेकिन अंत में उन्हें ऐसी डिग्रियां मिलती हैं, जो रोजगार दिलाने में मददगार नहीं होतीं। अदालत फर्जी विश्वविद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई की मांग से जुड़ी वकील शशांक देव सुधि की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। दिल्ली एचसी ने केंद्र सरकार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) को हलफनामा देकर यह बताने का निर्देश दिया कि ऐसे संस्थानों की बढ़ती संख्या रोकने के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए हैं।
अदालत ने कहा, “हम भारत सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) से भी अनुरोध करते हैं कि वह शिक्षा विभाग के अधिकारियों का ध्यान याचिका में उठाए गए मुद्दों की ओर आकर्षित करें और आवश्यक कार्रवाई के लिए कहें।” आगे कहा, “ऐसे संस्थानों की ओर आकर्षित होकर पढ़ाई करने वाले छात्रों का समय, ऊर्जा और संसाधन बर्बाद हो जाएंगे, क्योंकि उन्हें ऐसी डिग्रियां और योग्यताएं मिलेंगी जो उन्हें रोजगार पाने में मददगार साबित नहीं होंगी।”
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को यह बताने को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में फर्जी विश्वविद्यालयों की जांच के लिए बनाई गई समिति ने अब तक क्या कार्रवाई की है। अदालत ने आदेश दिया कि हलफनामे में यह भी बताया जाए कि समिति ने क्या जानकारी जुटाई और ऐसे फर्जी उच्च शिक्षण संस्थानों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। मामले की अगली सुनवाई अगस्त में होगी।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि स्थिति "चौंकाने वाली" है, क्योंकि कुछ फर्जी विश्वविद्यालय व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के साथ-साथ कानून और यहां तक कि चिकित्सा (मेडिकल) की पढ़ाई भी करा रहे हैं। इस पर अदालत ने जवाब दिया, “यह चौंकाने वाली बात नहीं है। यह जानकारी सभी के पास उपलब्ध है।”
याचिकाकर्ता ने अपनी जनहित याचिका में राजधानी और देश के अन्य हिस्सों में संचालित फर्जी विश्वविद्यालयों और गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों पर रोक लगाने के निर्देश देने की मांग की। याचिका में कहा गया है कि फर्जी विश्वविद्यालयों का लगातार संचालन लोगों के साथ धोखाधड़ी है और यह हजारों छात्रों के शिक्षा और रोजगार के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में “फर्जी विश्वविद्यालय” घोषित किए गए सभी संस्थानों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने और उनकी स्थापना में शामिल लोगों के खिलाफ सीबीआई से जांच कराने की भी मांग की गई है।
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