AICTE: देशभर में बंद हुए 55 से ज्यादा इंजीनियरिंग कॉलेज, पुराने छात्रों को डिग्री पूरी करने की मंजूरी

Press Trust of India | July 6, 2026 | 05:55 PM IST | 2 mins read

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने दाखिलों में कमी और मानकों का पालन न करने के कारण शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में देश भर के 58 इंजीनियरिंग कॉलेजों और 950 से अधिक कोर्सेज को बंद कर दिया है।

इन संस्थानों में पहले से पढ़ रहे वर्तमान छात्रों को 'प्रोग्रेसिव क्लोजर' नीति के तहत बिना किसी बाधा के अपनी डिग्री पूरी करने की अनुमति दी जाएगी। (आधिकारिक वेबसाइट)

नई दिल्ली : अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के अनुसार, शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के दौरान देश भर के 58 इंजीनियरिंग और तकनीकी कॉलेजों को बंद कर दिया गया है। हालांकि, इन संस्थानों में पहले से पढ़ रहे छात्रों के लिए राहत की बात यह है कि उन्हें अपनी पढ़ाई और कोर्स पूरा करने की अनुमति दी जाएगी। AICTE के एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि इन कॉलेजों को 'प्रोग्रेसिव क्लोजर' की मंजूरी दी गई है, जिसका मतलब है कि ये संस्थान इस शैक्षणिक वर्ष से प्रथम वर्ष में नए छात्रों को प्रवेश नहीं दे सकेंगे, लेकिन पुराने छात्र अपनी डिग्री पूरी होने तक पढ़ाई जारी रख सकते हैं।

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद द्वारा बंद होने वाले कुल 58 संस्थानों में से केवल 3 सरकारी सहायता प्राप्त थे, जबकि शेष 55 कॉलेज पूरी तरह से प्राइवेट यानी निजी तौर पर प्रबंधित थे।

राज्यवार आंकड़े कहां बंद हुए सबसे ज्यादा कॉलेज?

AICTE द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, कॉलेजों के बंद होने के मामलों में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सबसे आगे हैं। राज्यों की स्थिति इस प्रकार हैः

  1. उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र - दोनों राज्यों में सबसे ज्यादा 12-12 कॉलेजों को बंद किया गया है।
  2. मध्य प्रदेश - यहां कुल 8 कॉलेजों पर ताला लगा है।
  3. तेलंगाना और पंजाब - दोनों राज्यों में 4-4 संस्थान बंद हुए हैं।
  4. आंध्र प्रदेश और राजस्थान - यहां 3-3 कॉलेजों को बंद करने की अनुमति दी गई है।
  5. गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु - इन राज्यों में 2-2 कॉलेज बंद हुए हैं।
  6. हरियाणा, ओडिशा, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल - इन सभी राज्यों में 1-1 कॉलेज बंद रिकॉर्ड किया गया है।

950 से अधिक तकनीकी कोर्सेज भी हुए बंद

कॉलेजों के अलावा, AICTE ने इसी अवधि के दौरान देश भर के विभिन्न तकनीकी संस्थानों में चल रहे 950 से अधिक इंजीनियरिंग और तकनीकी कोर्सेज (पाठ्यक्रमों) को भी बंद करने का फैसला लिया है। तकनीकी शिक्षा नियामक ने स्पष्ट किया कि 'प्रोग्रेसिव क्लोजर' के तहत नामांकित छात्रों को अपनी शिक्षा पूरी करने का मौका मिलता है, जबकि 'कम्प्लीट क्लोजर' का अर्थ होता है कि संस्थान को पूरी तरह बंद कर दिया गया है और वहां पढ़ रहे छात्रों को दूसरे कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाता है।

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कॉलेज बंद करने के मुख्य कारण

देश में तकनीकी शिक्षा के सर्वोच्च नियामक (Regulator) AICTE ने बताया कि किसी भी संस्थान को बंद करने का आदेश मुख्यतः निम्नलिखित वजहों से दिया जाता है-

  1. छात्रों के दाखिले में कमी - कॉलेजों में सीटों का खाली रह जाना और बेहद कम एडमिशन होना।
  2. फैकल्टी की कमी - नियमों के अनुसार योग्य और आवश्यक प्रोफेसरों (शिक्षकों) को बनाए रखने में असमर्थता।
  3. बुनियादी ढांचे का अभाव - कॉलेज परिसर में इंफ्रास्ट्रक्चर और लैब आदि की कमी होना।
  4. नियमों का उल्लंघन - AICTE द्वारा तय किए गए संचालन मानदंडों और गाइडलाइंस का पालन न करना।
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