Press Trust of India | March 6, 2026 | 10:41 PM IST | 2 mins read
आरोप है कि शिक्षा विभाग में कुछ लोगों ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर व्याख्याता के पद पर नियुक्ति पाई है, जिसके खिलाफ 'नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड' ने उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की है।

देहरादून: उत्तराखंड के शिक्षा विभाग ने राज्य गठन के बाद से दिव्यांग कोटे के जरिये नियुक्त सभी 234 व्याख्याताओं (लेक्चरर) का स्वास्थ्य परीक्षण कराने का निर्णय लिया है। यह परीक्षण अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स)-ऋषिकेश में कराया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने इस संबंध में प्रदेश के सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दिए हैं।
निर्देशों के अनुसार, दिव्यांग कोटे के तहत नियुक्त सभी 234 व्याख्याताओं का स्वास्थ्य परीक्षण 7 मार्च से 2 अप्रैल तक एम्स-ऋषिकेश में कराया जाएगा। जांच सप्ताह में दो दिन-प्रत्येक बृहस्पतिवार और शनिवार सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक होगी।
एक दिन में 50 व्याख्याताओं की दिव्यांगता संबंधी जांच की जाएगी। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्याख्याता निर्धारित अवधि में स्वास्थ्य परीक्षण के लिए उपस्थित नहीं होता है, तो उसके विरुद्ध विभाग की ओर से एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है, जिसके लिए वे स्वयं ही जिम्मेदार होंगे।
आरोप है कि शिक्षा विभाग में कुछ लोगों ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर व्याख्याता के पद पर नियुक्ति पाई है, जिसके खिलाफ 'नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड' ने उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की है। इसी के बाद दिव्यांग कोटे से नौकरी पाने वाले सभी व्याख्याताओं की दिव्यांगता की जांच का निर्णय लिया गया है।
इस संबंध में प्रदेश के शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि जब भी सरकार के संज्ञान में ऐसे प्रकरण आते हैं, उनकी जांच कराने के बाद उचित कार्रवाई की जाती है। रावत ने कहा कि इस प्रकरण की जांच में भी जो लोग दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच, ऋषिकेश-एम्स के सहायक जनसंपर्क अधिकारी श्रीनॉय मोहंती ने कहा कि राज्य सरकार के अनुरोध पर अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण की सभी व्यवस्थाएं कर ली गयी हैं और मूत्र रोग (यूरोलॉजी) विभाग के डॉ मृत्युंजय कुमार को पैनल के प्रमुख के रूप नामित किया गया है।