सीबीएसई के डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम को लेकर छात्रों की ‘हताशा’ पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता
Press Trust of India | July 15, 2026 | 02:22 PM IST | 2 mins read
न्यायमूर्ति बागची ने सॉलिसिटर जनरल से मामले में स्थिति रिपोर्ट भी मांगी। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि याचिका में उठाई गई व्यक्तिगत अंकपत्र संबंधी कई शिकायतों का काफी हद तक समाधान किया जा चुका है।
नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर छात्रों की 'हताशा' पर चिंता जताई और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस मामले की सुनवाई में सहायता का अनुरोध किया। यह मामला एक जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें केंद्र सरकार और सीबीएसई को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वे ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली के तहत परीक्षाओं के संचालन के लिए उचित नियम और दिशानिर्देश तैयार करें।
सीबीएसई की ओएसएम मूल्यांकन प्रणाली एक डिजिटल जांच प्रक्रिया है, जिसमें शिक्षक छात्रों की भौतिक उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियों को कंप्यूटर स्क्रीन पर देखकर जांचते हैं, न कि कागज की मूल उत्तर पुस्तिकाओं पर।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा, ''छोटे बच्चों में हताशा का स्तर देखिए।''अदालत ने इस मामले में सॉलिसिटर जनरल की सहायता लेने की बात कही।
कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से मांगी रिपोर्ट
इस पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। पीठ ने कहा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में कुछ व्यवस्थित और धीरे-धीरे बढ़ती समस्याएं दिखाई दे रही हैं।
न्यायमूर्ति बागची ने सॉलिसिटर जनरल से मामले में स्थिति रिपोर्ट भी मांगी। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि याचिका में उठाई गई व्यक्तिगत अंकपत्र संबंधी कई शिकायतों का काफी हद तक समाधान किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि आवश्यक सुधारों की सिफारिश देने के लिए एस. राधा चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति गठित की गई है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा, '' समिति पहले से ही छात्रों की शिकायतों पर विचार कर रही है।''
मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह
कोर्ट ने बोर्ड द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी। यह जनहित याचिका राकेश बिंजोला की ओर से अधिवक्ता लक्ष्मीकांत शुक्ला के माध्यम से दायर की गई है।
याचिका में सरकार और बोर्ड को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे ओएसएम मूल्यांकन प्रणाली के माध्यम से परीक्षाएं आयोजित करने के लिए स्पष्ट नियम बनाएं और सुधारों की निगरानी एवं क्रियान्वयन के लिए समिति गठित करें।
याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की है कि जिन छात्रों को अस्थायी प्रवेश मिल चुका है या जिन्होंने प्रवेश परीक्षाएं पास कर ली हैं, उन्हें न्यूनतम योग्यता अंकों में राहत दी जाए। साथ ही विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए निर्धारित कक्षा 12 में 75 प्रतिशत या अन्य न्यूनतम अंक की अनिवार्यता से भी उन्हें छूट देने का निर्देश दिया जाए।
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