Paper Leak: प्रश्नपत्र लीक होने की समस्या का समाधान संभव, नंदन नीलेकणि ने प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर दिया जोर

Press Trust of India | October 13, 2026 | 03:44 PM IST | 2 mins read

नीलेकणि ने कहा, ''अगर हम इस समस्या को व्यवस्थित तरीके से देखें, इसके मूल कारणों तक पहुंचें और समाधान के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करें, तो इन समस्याओं को हल किया जा सकता है।''

नीलेकणि ने कहा कि ये सभी व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं हैं, जिनका समाधान हमारी समिति करेगी। (प्रतीकात्मक-विकिमीडिया कॉमन्स)

नई दिल्ली: इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि ने मंगलवार को कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने की समस्या का व्यवस्थित तरीके से समाधान किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने इससे निपटने के लिए प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल की वकालत की। राष्ट्रीय राजधानी में 'ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026' में नीलेकणि ने कहा कि परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने की समस्या का समाधान संभव है और इसके लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल जरूरी है।

उन्होंने कहा, ''अगर हम इस समस्या को व्यवस्थित तरीके से देखें, इसके मूल कारणों तक पहुंचें और समाधान के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करें, तो इन समस्याओं को हल किया जा सकता है।''

नीलेकणि ने कहा, ''ये सभी व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं हैं, जिनका समाधान हमारी समिति करेगी। मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री हमारे सुझावों को लागू करने के लिए काफी उत्सुक हैं।''

NTA Reforms: प्रश्न-पत्र लीक होने से रोकने के उपाय

नीलेकणि परीक्षा सुधारों पर गठित उच्चस्तरीय कार्यबल के प्रमुख हैं। इस कार्यबल का गठन जुलाई में किया गया था। मई में नीट यूजी का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद चिकित्सा प्रवेश परीक्षा रद्द कर दी गई और फिर दोबारा परीक्षा करानी पड़ी थी।

नीलेकणि ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने से रोकने का एक तरीका यह है कि पहले से तय प्रश्नपत्र तैयार करने के बजाय प्रश्नों के बड़े संग्रह से परीक्षा के लिए आखिरी समय में प्रश्नपत्र बनाया जाए।

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नीलेकणि ने प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर दिया जोर

यह पूछे जाने पर कि क्या एआई की मदद से परीक्षा वाले दिन प्रश्नपत्र तैयार किया जा सकता है, नीलेकणि ने ''हां'' में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि समिति सभी परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलने के विकल्प पर भी विचार कर रही है।

उन्होंने आगे कहा कि इसके लिए उन केंद्रों का नेटवर्क बढ़ाना होगा, जहां फिलहाल छात्र ऐसी परीक्षाएं दे सकते हैं। इन केंद्रों की संख्या करीब 1.5 लाख है। नीलेकणि ने कहा कि बड़े पैमाने पर प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते समय उनका हमेशा ध्यान इस बात पर रहता है कि इससे लोगों के लिए ऐसा समाधान कैसे तैयार हो, जिससे सभी को लाभ हो।

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