Press Trust of India | October 11, 2026 | 05:14 PM IST | 2 mins read
यह रिपोर्ट नीट के प्रश्नपत्र लीक होने के विवाद और एनटीए में कथित प्रशासनिक खामियों के बाद आई है। इस विवाद के कारण देशभर में छात्रों ने प्रदर्शन किए थे और अंततः तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था।

नई दिल्ली: संसदीय समिति ने सिफारिश की है कि अहम प्रतियोगी परीक्षाओं के दिन जिला प्रशासन को किसी भी रैली, जुलूस या जनसभा की अनुमति नहीं देनी चाहिए ताकि यातायात सुचारू रहे, कानून-व्यवस्था के पर्याप्त इंतजाम पहले से हों और किसी भी परीक्षार्थी को बाहरी व्यवधानों का सामना न करना पड़े। राज्यसभा सदस्य मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसद की स्थायी समिति ने शुक्रवार को राज्यसभा के सभापति को एनटीए में सुधार और उसे मजबूत बनाने से संबंधित रिपोर्ट में यह सिफारिश की।
यह रिपोर्ट नीट के प्रश्नपत्र लीक होने के विवाद और एनटीए में कथित प्रशासनिक खामियों के बाद आई है। इस विवाद के कारण देशभर में छात्रों ने प्रदर्शन किए थे और अंततः तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था।
रिपोर्ट में कहा गया है, ''परीक्षा के दिन रैलियों-जुलूसों या बड़ी सभाओं के चलते परीक्षार्थियों को सेंटर पहुंचने में देरी हो सकती है। ऐसे में, जिला प्रशासन इस दौरान किसी भी रैली, जुलूस या अन्य जनसभा के आयोजन को अनुमति न दें।
साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाए कि यातायात सुचारू रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त इंतजाम पहले से हों, ताकि किसी भी परीक्षार्थी को टाले जा सकने वाले बाहरी व्यवधान का सामना न करना पड़े।''
संसदीय समिति ने प्रक्रियागत मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि परीक्षा केंद्रों पर कुछ मिनट की देरी से पहुंचने वाले परीक्षार्थियों को अक्सर प्रवेश ही नहीं दिया जाता जिससे उनकी पूरे साल की मेहनत बेकार हो जाती है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ''समिति का विचार है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिसके तहत छात्रों को देर से पहुंचने का कारण दर्ज करने वाले लिखित वचनपत्र पर हस्ताक्षर कराने के बाद परीक्षा कक्ष में प्रवेश दिया जा सके।"
उन्हें केवल बचे हुए समय में परीक्षा देने की अनुमति हो और किसी भी परिस्थिति में अतिरिक्त समय नहीं दिया जाए। समिति ने यह भी कहा कि निरीक्षकों द्वारा हस्ताक्षर कराने और जांच संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने में समय लगता है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ''समिति का विचार है कि ऐसी औपचारिकताओं के लिए परीक्षा शुरू होने से पहले या समाप्त होने के बाद 15 मिनट का अलग समय निर्धारित किया जाए और परीक्षा अवधि के बीच ये औपचारिकताएं पूरी न की जाएं।''
उच्चतम न्यायालय की ओर कहा गया है कि शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने वाले लोगों को कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया जाए। दिल्ली मेट्रो और रेलवे सेवाएं सामान्य रूप से बहाल की जाएं।
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