Press Trust of India | April 13, 2026 | 09:41 AM IST | 2 mins read
जेएसएससी के बयान में कहा गया है कि बिहार के जहानाबाद निवासी आरोपी कई पेपर लीक मामलों में कथित तौर पर शामिल रहा है, जिनमें राजस्थान क्लर्क भर्ती परीक्षा, नीट परीक्षा, बिहार सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी भर्ती परीक्षा और उत्तर प्रदेश समीक्षा एवं सहायक समीक्षा अधिकारी प्रारंभिक परीक्षा शामिल हैं।

नई दिल्ली : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) ने झारखंड एक्साइज कांस्टेबल प्रतियोगी परीक्षा (जेईसीसी) 2023 में शामिल हुए कुल 159 उम्मीदवारों और पांच अन्य लोगों को कथित तौर पर प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पांचों मुख्य आरोपी प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं में लिप्त एक गिरोह के सदस्य हैं।
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) के अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने बताया कि तामर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के रारगांव में एक इमारत में उम्मीदवारों की बड़ी भीड़ जमा होने की सूचना रांची एसएसपी को मिली थी, जिसके बाद ये गिरफ्तारियां की गईं।
जेएसएससी के अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने बताया कि छात्रों को प्रश्नपत्रों के चार सेट दिए गए थे, जिनके बारे में दावा किया गया था कि वे जेईसीसी परीक्षा के प्रश्न हैं। प्रिंट और डिजिटल प्रारूपों में दिए गए प्रश्नपत्र जब्त कर लिए गए। हालांकि, वे आज की परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से पूरी तरह मेल नहीं खाते थे।
जेएसएससी द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, जांच के दौरान यह बात सामने आई कि आरोपी उम्मीदवारों को गिरोह के एजेंटों द्वारा 10-15 लाख रुपये प्रति उम्मीदवार की दर से उस स्थान पर लाया गया था, ताकि उन्हें परीक्षा के प्रश्न और उत्तर उपलब्ध कराए जा सकें। इन उम्मीदवारों ने पुलिस से बचने के लिए अपने मोबाइल फोन और एडमिट कार्ड गिरोह के सदस्यों को सौंप दिए थे। कुछ उम्मीदवारों ने गिरोह के सदस्यों के नाम पर बैंक चेक भी जारी किए थे।
बयान में कहा गया है कि बिहार के जहानाबाद निवासी आरोपी कई पेपर लीक मामलों में कथित तौर पर शामिल रहा है, जिनमें राजस्थान क्लर्क भर्ती परीक्षा, नीट परीक्षा, बिहार सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी भर्ती परीक्षा और उत्तर प्रदेश समीक्षा एवं सहायक समीक्षा अधिकारी प्रारंभिक परीक्षा शामिल हैं। जेएसएससी अध्यक्ष ने कहा कि पूछताछ जारी है, जबकि इस मामले में शामिल अन्य लोगों को पकड़ने के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है।
इस बीच, भाजपा ने इस घटनाक्रम के मद्देनजर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ कुछ स्थानों पर प्रदर्शन किए और आरोप लगाया कि राज्य सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। भाजपा की रांची महानगर इकाई और पूर्वी एवं पश्चिमी सिंहभूम जिलों की इकाइयों ने विरोध में मुख्यमंत्री का पुतला जलाया। उन्होंने परीक्षा को दोबारा आयोजित करने की भी मांग की।