IIM Sambalpur PhD Programme 2024: आईआईएम संबलपुर ने हाइब्रिड मोड में शुरू किया पीएचडी प्रोग्राम
Abhay Pratap Singh | July 22, 2024 | 06:45 PM IST | 3 mins read
आईआईएम संबलपुर के 2024 पीएचडी बैच में विभिन्न कंपनियों के सीईओ, सीओओ, एमडी, वीपी, डिप्टी मजिस्ट्रेट, सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस भी शोध करेंगे।
नई दिल्ली: आईआईएम संबलपुर ने अपने परिसर में हाइब्रिड मोड में पीएचडी के छठे बैच और एग्जिक्यूटिव पीएचडी प्रोग्राम 2024 के 5वें बैच का उद्घाटन किया। समारोह में शोध पद्धति पर व्यावहारिक चर्चा को शामिल किया गया, जिसमें अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय शिक्षाविदों, अधिकारियों और उद्योग जगत के लीडर की सहभागिता रही।
उद्घाटन समारोह के दौरान चर्चाओं का उद्देश्य शोध अनुभव साझा करना और आईआईएम संबलपुर में नए नामांकित पीएचडी छात्रों का मार्गदर्शन करना था। एग्जिक्यूटिव पीएचडी छात्र वर्तमान में रक्षा बल, सरकारी संगठनों, आईटी उद्योग और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
आईआईएम संबलपुर के 2024 पीएचडी और एग्जिक्यूटिव पीएचडी कार्यक्रमों में कुल 25 उम्मीदवारों में से कई विभिन्न कंपनियों के सीईओ, सीओओ, एमडी, वीपी, डिप्टी मजिस्ट्रेट, सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस, बिजनेस हेड और आईआईटी फैक्लटी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर हैं। इसके अलावा, कुछ गूगल, एक्सेंचर, फ्लिपकार्ट, पिडिलाइट इंडस्ट्रीज आदि में कार्यरत हैं।
आईआईएम संबलपुर के डायरेक्टर प्रोफेसर महादेव जायसवाल ने कहा, “इनोवेशन को बढ़ावा देने और वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने में अनुसंधान के महत्व पर जोर दिया गया है। वैज्ञानिक खोज में दो प्राथमिक विधियां प्रत्यक्षवादी और व्याख्यावादी दृष्टिकोण शामिल हैं। प्रत्यक्षवादी विधि स्थापित सिद्धांत पर आधारित परिकल्पना से शुरू होती है। जबकि, व्याख्यावादी दृष्टिकोण असामान्य तथ्यों से शुरू होता है जो पारंपरिक सिद्धांतों को चुनौती देते हैं।”
अमरीका की आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी में आइवी कॉलेज ऑफ बिजनेस के इंडस्ट्री इंगेजमेंट एसोसिएट डीन प्रो. राज अग्निहोत्री ने कहा, “बड़ा सोचो, एक इनोवेटर की तरह सोचो। यह समय केवल मौजूदा सिद्धांतों को मानते रहने से कहीं अधिक आगे बढ़ने और ऐसे समाधान खोजने का है जो व्यवसायों, समाज और समुदायों पर वास्तविक प्रभाव डालते हैं। पीएचडी छात्रों के रूप में आपके पास दुनिया भर के विशेषज्ञों और साथियों तक पहुंचने और उनसे जुड़ने का अवसर है।”
अमरीका में अलबामा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विशाल गुप्ता ने कहा, “विश्व चैंपियन की मानसिकता के साथ अपनी पीएचडी यात्रा शुरू करें। जिस तरह ओलंपिक एथलीट सीमाओं से आगे बढ़ते हैं, उसी तरह उच्च गुणवत्ता वाले शोध और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की चुनौती को स्वीकार करें। याद रखें, शिक्षा में सच्ची सफलता नवाचार की निरंतर खोज और खुद के लिए हाई स्टैंडर्ड स्थापित करने के साहस से आती है।”
भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार (स्वास्थ्य) डॉ. केके त्रिपाठी ने शैक्षणिक यात्रा में जुनून के महत्व को बताते हुए कहा, “आपका पैशन आपकी शैक्षणिक यात्रा की आधारशिला है। जुनून के साथ काम करें और यह आपको नया ज्ञान हासिल करने और जटिल समस्याओं से निपटने के लिए प्रेरित करेगा। जैसे-जैसे आप शोध में आगे बढ़ेंगे, मौजूदा ज्ञान में मूल्य जोड़ने पर ध्यान केंद्रित करेंगे और एक अधिकारी बनने के लिए अपने क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करेंगे।”
ओडिशा में बेलपहाड़ की टीआरएल क्रोसाकी रिफ्रैक्टरीज लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट (एचआर) डॉ. आरके सिंह ने कहा, “शोध केवल एक अकादमिक खोज नहीं है, बल्कि आत्म-खोज और नवाचार की यात्रा है। हम ऑटोमेशन और एआई में आगे बढ़ रहे हैं, हमें मौजूदा प्रतिमानों को चुनौती देने और नए मोर्चे तलाशने के लिए शोध को एक उपकरण के रूप में अपनाना चाहिए। शोध की शक्ति पारंपरिक ज्ञान पर सवाल उठाने, उसे मान्य करने और उसे बदलने की इसकी क्षमता में निहित है, जो अंततः विविध क्षेत्रों में ज्ञान की हमारी समझ और अनुप्रयोग को बढ़ाती है।”
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