NEET Paper Leak: एक नहीं कई बार लीक हो चुका है नीट का पेपर; जानिए काला सच

Santosh Kumar | July 23, 2026 | 01:31 PM IST | 4 mins read

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसमें हर साल 20 लाख से अधिक छात्र शामिल होते हैं।

NEET 2026 College Predictor

Predict your MBBS, BDS & AYUSH admission chances with the NEET College Predictor. Get personalized college recommendations based on rank, category & quota.

Try Now
2015 से 2026 के बीच, नीट परीक्षा में गड़बड़ी के कम से कम 3 बड़े विवाद सामने आए हैं। (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)

नई दिल्ली: नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसमें हर साल 20 लाख से अधिक छात्र शामिल होते हैं। हालांकि, पिछले दशक में पेपर लीक की घटनाओं ने परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। 2015 से 2026 के बीच, कथित पेपर लीक से जुड़े कम से कम 3 बड़े विवाद सामने आए हैं, जिनकी वजह से परीक्षा रद्द करने या दोबारा कराने तक की नौबत आई। इस लेख में, हम पिछले दशक में भारत में नीट पेपर लीक की घटनाओं, उनमें शामिल अनियमितताओं और उन्हें रोकने के लिए मोदी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।

वर्ष 2015 में मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम का पेपर और उसकी आंसर की लीक हो गई। उस समय इस परीक्षा को नीट के बजाय एआईपीएमटी (ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट) कहा जाता था और इसे सीबीएसई आयोजित करता था।

ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट (एआईपीएमटी) का नाम बदलकर नीट (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) करने का मुख्य कारण पूरे देश में मेडिकल एडमिशन के लिए 'एक देश, एक परीक्षा' सिस्टम को लागू करना था।

NEET Paper Leak: नीट का पेपर कितनी बार लीक हुआ?

नाम बदलने के बाद, नीट 2016 (फेज-2) में पेपर लीक होने के दावे और अफवाहें सामने आई थीं, लेकिन लीक की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई थी। नतीजतन, 2015 की परीक्षा के विपरीत, यह परीक्षा रद्द नहीं की गई।

साल 2021 में भी नीट पेपर लीक और 'सॉल्वर गैंग' की गतिविधियां सामने आईं, जिसके चलते स्थानीय स्तर पर गिरफ्तारियां हुईं। मुख्य रूप से राजस्थान (जयपुर) और उत्तर प्रदेश (वाराणसी) में बड़े 'सॉल्वर गैंग' का पर्दाफाश हुआ।

साल 2024 में नीट का पेपर लीक हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान माना कि प्रश्न-पत्र का लीक होना एक निर्विवाद तथ्य है। हालांकि, यह लीक बड़े पैमाने पर नहीं था, बल्कि चुनिंदा परीक्षा केंद्रों और छात्रों तक ही सीमित रहा।

झारखंड के ओएसिस स्कूल में नीट पेपर चोरी का मामला सामने आया; इसकी सीबीआई जांच हुई और कुछ छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा हुई। एनटीए ने कुछ सेंटर्स पर समय के नुकसान की भरपाई के लिए गलती से ग्रेस मार्क्स दिए।

Also read पेपर लीक पर पीएम मोदी का ऐलान- फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे, दोषियों को मिलेगी कड़ी सजा; विपक्ष हमलावर

NEET Paper Leak 2026: नीट 2026 पेपर लीक बड़े पैमाने पर

नीट पेपर लीक विवाद के बाद मोदी सरकार की ओर से परीक्षा प्रणाली में सुधार और एनटीए के कामकाज की समीक्षा के लिए, इसरो के पूर्व चेयरमैन डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया।

सरकार द्वारा बनाई समिति का काम एनटीए के डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करना, परीक्षा केंद्रों के आवंटन की समीक्षा करना और पूरी परीक्षा प्रक्रिया को त्रुटिहीन और पारदर्शी बनाने के लिए तकनीकी सुधारों की सिफारिश करना था।

सरकार ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसा नहीं होगा, लेकिन इसके बाद भी 3 मई 2026 को नीट परीक्षा हुई। राजस्थान के सीकर समेत कोचिंग हब में एक 'गेस पेपर' वायरल हुआ, जिसमें अधिकतर सवाल असल परीक्षा से मेल खा गए।

बड़े पैमाने पर पेपर लीक होने के कारण परीक्षा रद्द कर दी गई और दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया। एनटीए ने 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई, लेकिन मूल परीक्षा रद्द होने के बाद 20 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या का रास्ता चुना।

Also read Paper Leak Row: 10 साल में 152 पेपर लीक; राहुल ने कहा- धर्मेंद्र प्रधान को हटाएं, पीएम छात्रों से मांगें माफी

NEET Paper Leak Controversy: पेपर लीक का विवाद आंदोलन में बदला

एनटीए द्वारा आयोजित नीट यूजी 2026 पेपर लीक से जुड़ी खबर आधिकारिक तौर पर 11 मई और 12 मई, 2026 के बीच सामने आई। नीट 2026 पेपर लीक का विवाद इतना बढ़ गया कि इसको बस एक चिंगारी की आवश्यकता थी।

15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कथित तौर पर सिस्टम पर सवाल उठाने वाले कुछ एक्टिविस्ट और बेरोजगार युवाओं की तुलना "कॉकरोच" और "समाज के परजीवी" से की।

इसके बाद, अमेरिका से पढ़ाई करके लौटे 30 साल के सोशल मीडिया पॉलिटिकल स्ट्रैटेजिस्ट और आम आदमी पार्टी के पूर्व वॉलंटियर अभिजीत दिपके ने एक ऑनलाइन कैंपेन के जरिए 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) बनाई।

परीक्षा प्रणाली में लगातार गड़बड़ियों और युवाओं में आत्महत्या की घटनाओं ने 20 जून को शुरू हुए इस ऑनलाइन मुहिम को जमीनी आंदोलन में बदल दिया है। आज छात्र शिक्षा प्रणाली में सुधार और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने अभिजीत दिपके का साथ दिया और 28 जून को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) आंदोलन का हिस्सा बन गए; उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की, जो अब अपने 26वें दिन में है।

MakeCAREERS360
My Trusted Source
Add as a preferred source on google
[

विशेष समाचार

]
[

नवीनतम शिक्षा समाचार

]